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सबौर को देश के सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केंद्र का पुरस्कार 

सबौर/02.07.19 । कृषि विज्ञान केंद्र सबौर सबौर, भागलपुर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन (राष्ट्रीय) पुरस्कार प्रदान किया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र को देश का सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केंद्र घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत 25 लाख राशि भारत सरकार देगी। पुरस्कार आईसीएआर के स्थापना दिवस 16 जुलाई, 2019 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में मिलेगा।  

साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र बांका, रोहतास एवं औरंगाबाद को भी पुरस्कृत किया गया है। इससे पहले 2013 में कृषि विज्ञान केंद्र सबौर को आईसीएआर से सर्वोत्तम कृषि विज्ञान केंद्र (क्षेत्रीय) पुरस्कार मिल चुका है। 

कृषि विज्ञान केेंद्र, बांका की उपलब्धि : जिले के अमरपुर प्रखंड अंतर्गत सिझुआ गांव की महिला किसान सविता देवी को पशुपालन क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय श्रेष्ठ किसान पुरस्कार मिला है। पुरस्कार में उन्हें पचास हजार राशि मिलेगी। 

कृषि विज्ञान केंद्र विक्रमगंज (रोहतास) : बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र विक्रमगंज (रोहतास) को आईसीएआर ने दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार (जोनल) प्रदान किया है। इसके अंतर्गत 2.50 लाख की राशि मिलेगी। केंद्र को उन्नत खेती के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (खेतों में फसल अवशेष को न जलाने) के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए पुरस्कार मिला है। 

कृषि विज्ञान केंद्र, औरंगाबाद : कृषि विज्ञान केंद्र औरंगाबाद को आईसीएआर की नेशनल इनिसियेटिव फाॅर क्लाईमेट रेजीलेन्ट एग्रीकल्चर (निक्रा) योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए बेस्ट निक्रा अवार्ड (जोनल) प्रदान किया गया है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में वर्षा जल के संचयन सहित उन्नत कृषि तकनीक के क्रियान्वयन के लिए पुरस्कार दिया गया है।   

कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर : कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर को पुरस्कार कृषिजीवी महिलाओं के आर्थिक एवं तकनीकी उत्थान, किसानों के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन, कम कृषि लागत पर अधिक उत्पादन तथा किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास के आधार पर दिया गया है। 

केंद्र ने छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए एक एकड़ क्षेत्रफल के लिए समन्वित कृषि प्रणाली विकसित की है। इसमें पशु एवं बकरी पालन, मछली एवं मछली जीरा उत्पादन, मधुमक्खी एवं बत्तख पालन आदि को समावेशित करके किसानों को व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित किया है। साथ ही बहु स्तरीय कृषि, आम एवं अमरूद की सघन बागवानी, कम लागत में वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन सहित अन्य कृषि आधारित छोटे उद्योगों को स्वरोजगार सृजन के लिए विकसित करने का प्रशिक्षण दिया। 
 


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