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अनुच्छेद 370 खत्म, जम्मू-कश्मीर अब केंद्रशासित प्रदेश 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने इस संदर्भ में दोनों सदनों में संकल्प पेश किया, जिसे मंजूरी मिल गई। अनुच्छेद 370(1) को छोड़ सभी खंडों को हटा दिया गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू होगा। कश्मीर में 26 जनवरी 1957 सेे अपना संविधान लागू है। 

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को भी संसद से मंजूरी मिल गई है। राज्य विभाजन बिल में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब केंद्र शासित प्रदेश होंगे। लद्दाख अभी जम्मू-कश्मीर राज्य में है। जम्मू-कश्मीर में दिल्ली की तरह  विधानसभा होगी जबकि लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी। विधानसभा का कार्यकाल छह की जगह पांच साल का होगा। 

जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब राज्यों की संख्या 28 और केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या 9 हो जायेगी। हालांकि गृहमंत्री ने सदन में कहा है कि जम्मू-कश्मीर लंबे समय तक केंद्रशासित प्रदेश नहीं रहेगा। स्थिति सामान्य होने के बाद उसे राज्य का दर्जा मिलेगा। 

370 हटने के बाद बदलाव : दोहरी नागरिकता समाप्त, अनुच्छेद 356 व 360 लागू, जम्मू-कश्मीर में अब कोई भी संपत्ति की खरीद एवं नौकरी कर सकेगा, महिलाओं से भेदभाव समाप्त, अलग झंडा नहीं एवं हर कानून लागू होगा (पहले रक्षा, विदेश और संचार छोड़ कोई कानून यहां लागू नहीं था), राज्यपाल का पद समाप्त अब उप राज्यपाल होंगे, राज्य की पुलिस केंद्र के अधीन होगी।  

सदन की कार्यवाही से पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा के साथ धारा 370 को खत्म करने का फैसला लिया गया। राष्ट्रपति ने भी इस संबंध में राजपत्र पर हस्ताक्षर कर दिया है। 

सरकार के निर्णय का बीजू जनता दल (बीजेडी), बीएसपी, शिवसेना, आप, एआईएडीमके और वाईएसआर-सीपी ने समर्थन किया है। बिहार में एनडीए की सहयोगी जदयू ने बिल का विरोध किया है। 

इधर, केंद्र सरकार ने मौजूदा परिस्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कश्मीर भेजा है। सुरक्षा एजेंसियों को चौकस रहने के साथ राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों को भी हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश है। 
 


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