नई दिल्ली/पटना। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का एम्स में शनिवार की दोपहर 12.07 बजे निधन हो गया। रविवार को दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार होगा। 9 अगस्त 2019 को सांस में तकलीफ की वजह से उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था। साॅफ्ट टिश्यू सरकोमा (कैंसर) से भी वह परेशान थे। बिहार सरकार ने उनके निधन पर दो दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की हैै।
67 वर्षीय जेटली के निधन की खबर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री, सभी केंद्रीय मंत्री, बिहार समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री एवं विभिन्न राजनीतिक दल के नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।
अब तक की सबसे बड़ी कर व्यवस्था जीएसटी लागू करने वाले अरुण जेटली ही थे। बैंकिंग एवं बजट व्यवस्था में सुधार, जनधन योजना शुरू करने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्होंने वित्त एवं रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। 2018 में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद वह बीमार चल रहे थे। दूसरी पारी में बीमारी की वजह से उन्होंने मंत्रालय लेने से इनकार कर दिया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शोक संदेश में कहा है कि अरुण जेटली विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वह एक उत्कृष्ट न्यायविद भी थे। उन्होंने उच्च राजनीतिक मूल्य एवं आदर्श की बदौलत सार्वजनिक जीवन में उच्च शिखर को प्राप्त किया। अपने व्यक्तित्व की बदौलत राजनीतिक सीमाओं के परे सभी विचारधारा के राजनीतिक दलों का आदर एवं सम्मान प्राप्त किया। उनका निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। उनकी कमी हमेशा खलेगी।
डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने अरुण जेटली के निधन को पार्टी के साथ देश के के लिए भी बड़ी क्षति बताया है। उन्हें एक देश, एक कर के संकल्प को सिद्ध करने वाले महान नेता के रूप में याद किया जायेगा। मेरी पुस्तक बीच समर में की भूमिका भी उन्होंने लिखी थी।