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त्याग से जीवन में आती है शांति

पटना । जैन महापर्व पर्युषण के आठवें दिन आचार्य भद्रबाहु ने बताया कि त्याग के बिना हमारा जीवन अधूरा है। त्याग एक ओर जहां हमें परिग्रह से मुक्ति दिलाता है, तो दूसरी ओर हमें शांति और सुकून का एहसास भी कराता है। दान हमेशा जरूरतमंद को ही करना चाहिए। अपनी आय का कुछ न कुछ हिस्सा अवश्य दान करें। दान देकर पछतावा नहीं करना चाहिए। तप की अग्नि में विकारों को जलाना त्याग है। 

मुनि आचार्य ने बताया कि त्याग से आत्मदृष्टि एवं करुणा का विस्तार होता है। व्यक्ति के जीवन में दया एवं सेवा की भावना का विकास होता है। उसका चित्त उदार बनता है। त्याग का अहंकार नहीं करे बल्कि अहंकार का त्याग करे। उत्तम त्याग वह होता है जो मन की सहज भावना से प्रेरित होकर किया जाता है। उत्तम त्याग में व्यक्ति अपनी कीर्ति, प्रशंसा एवं यश की कामना नहीं करता है। 


              
त्याग दिवस पर आज जैन समाज की लड़कियों एवं महिलाओं ने 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा। पर्युषण के आठवें दिन की शांतिधारा का सौभाग्य इशान जैन एवं मुकेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ। महाआरती का सौभाग्य शांतिलाल जैन एवं महेश जैन सेठी परिवार को मिला। 

महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य नीरू जैन, कुसुम पांड्या, अर्चना जैन, किरण जैन, संतोष जैन, कल्पना जैन, संजू जैन, सरला छाबड़ा, मेघना जैन, मनसा जैन, स्वीकृति जैन, रानी पाटनी एवं निशि जैन परिवार को प्राप्त हुआ। श्री दिगम्बर जैन मंदिर, मीठापुर में भोपाल से आये बाल ब्रह्मचारी अनिल भैयाजी के निर्देशन में सभी कार्यक्रम संपन्न हुए।  


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