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अर्थशास्त्रियों ने कहा, आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं हम

पटना। शिव नादर यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के डाॅ पार्थ चटर्जी का मानना है कि भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। चीन की आर्थिक विकास दर धीमी है। इसी तरह इंग्लैड की अर्थव्यवस्था वर्तमान वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में संकुचित हुई है। इस कारण अधिकतर देशों के केंद्रीय बैंकों ने ऋण दर में कमी की है। डाॅ चटर्जी बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) परिसर में वर्तमान आर्थिक परिदृश्य पर आयोजित एक पेनल डिस्कशन को संबोधित कर रहे थे। बीआईए की ओर से अध्यक्ष केपीएस केशरी एवं अन्य सदस्यों ने भाग लिया।

डाॅ चटर्जी ने अमेरिका एवं चीन के बीच जारी व्यापारिक युद्ध को भी इस मंदी के लिए जिम्मेदार माना। अमेरिका एवं चीन के बीच चल रहे व्यापारिक युद्ध का फायदा भारत को कृषि क्षेत्र में मिलेगा। उन्होंने सलाह दी कि वर्तमान आर्थिक परिस्थिति का उपयोग नवीनतम तकनीकी अपनाने एवं आने वाले समय में अच्छी संभावना दिखने वाले प्रक्षेत्र में निवेश करने के लिए करना चाहिए। साथ ही देश के कामगारों में कौशल विकास भी करना होगा।

आद्री के डाॅ पी. पी. घोष ने कहा कि लगातार तीन तिमाही विकास दर गिरावट की ओर हो, तो इसे आर्थिक मंदी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने भारत के संदर्भ में सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को खर्च बढ़ाना होगा। इससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ मांग बढ़ेगी। आर्थिक मंदी मांग में कमी या निवेश की कमी के कारण पैदा होती है। 

आद्री के डाॅ सुघांशु कुमार ने बताया कि वर्तमान आर्थिक मंदी से निबटने के लिए मांग का बढ़ना जरूरी है। यह मध्यम वर्ग से ही संभव है। इसके लिए सरकारी निवेश के माध्यम से रोजगार उत्पन्न करने की आवश्यकता है। डाॅ नवल किशोर चौधरी का मानना है कि आर्थिक मंदी से उबरने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। बैंक ब्याज दर घटाने के साथ उद्योगों को कुछ प्रोत्साहन देना होगा। 
 


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