पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों को फसल चक्र अपनाने पर जोर दिया। साथ ही कृषि विभाग को फसल चक्र कार्यक्रम के तहत चयनित जिलों में रिसर्च का निर्देश दिया। उन्होंने कहा राज्य के किसानों की स्थिति फसल उत्पादन पर निर्भर है। कुछ वर्षों से राज्य में वर्षा कम हो रही है। इसका असर खेती पर पड़ रहा है। इस संदर्भ में फसल चक्र कार्यक्रम उपयोगी होगा।
सीएम ने एक अणे मार्ग में जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम की समीक्षा बैठक के दौरान कृषि विभाग को कई निर्देश दिये। उन्होंने कहा उत्तर बिहार में बाढ़ एवं दक्षिण बिहार में सुखाड़ की स्थिति में फसलों के चयन पर विशेष ध्यान की जरूरत है। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में फसल चक्र का प्रदर्शन उपयुक्त होगा। किसान वहां आसानी से इसे समझ सकेंगे और प्रेरित होकर फसल चक्र को अपनायेंगे। सब्जी की खेती में आलू को शामिल करने, जैविक खेती में फसल चक्र एवं परंपरागत फसलों पर रिसर्च पर उन्होंने जोर दिया।
कृषि विभाग के सचिव एन. श्रवण कुमार ने जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम से संबंधित प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत चार संस्थान बोरलॉग इंस्टीच्यूट फॉर साउथ एशिया, इंटरनेशनल मेज एंड व्हीट इंप्रुवमेंट सेंटर आईसीएआर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर एवं राजेंद्र सेंट्रल कृषि विश्वविद्यालय पूसा काम करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य खरीफ, रबी एवं गरमा फसलों का अधिकतम उत्पादन करना है।
बैठक में मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत एवं चंचल कुमार, सीएम सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी, बोरलॉग इंस्टीच्यूट फॉर साउथ एशिया पूसा के वैज्ञानिक राज कुमार जाट समेत कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।