मुख्य समाचार

पर्युषण के अंतिम दिन जैन मुनि ने बतायी ब्रह्मचर्य की महिमा 

पटना । जैन महापर्व पर्युषण के अंतिम दिन दिगंबर जैन मंदिर कांग्रेस मैदान, कदमकुआं,  मीठापुर, मुरादपुर एवं गुलजारबाग में शांति धारा पूजा हुई। मध्य प्रदेश से आये डॉ आशीष जैन ने श्रावकों को ब्रह्मचर्य धर्म की संगीतमय पूजा कराई।

आचार्य भद्रबाहुजी ने बताया कि ब्रह्मचर्य  का अर्थ है ब्रह्म स्वरूप आत्मा में रमण करना। ब्रह्मचर्य धर्म के पालन से शरीर सुढृढ़ एवं ज्ञान की वृद्धि होती है। विषय वासनाओं में लीन मनुष्य धर्म के तत्व को नहीं पहचान पाता है। काम वासना पर विजय प्राप्त करना अत्यंत कठिन कार्य है। सामान्य व्यक्ति अपने जीवन से काम और वासना को निर्मूल नहीं कर पाता है। मुनि एवं तपस्वी काम और वासना को निर्मूल कर उग्र ब्रह्मचर्य व्रत धारण करते हैं।   

जैन भगवान बासुपूज्य के निर्वाण पर श्रावकों ने भगवान का 108 कलशों से अभिषेक किया। साथ ही 51 किलो लड्डू चढ़ाया। मुख्य लड्डू चढ़ाने का सौभाग्य पंकज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। पर्युषण के अंतिम दिन की शांतिधारा का सौभाग्य राजेश जैन, चंद्रेश जैन एवं मनोज बडजात्या परिवार को मिला। महाआरती का सौभाग्य सुरेन्द्र गंगवाल परिवार एवं महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य साधना जैन, रीता जैन, नंदलाल जैन एवं पुखराज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। 
 
दस दिनों के पर्युषण पर्व पर दर्जनों महिला एवं पुरुषों ने एक-दो दिन का निर्जला उपवास रखा। एक श्राविका निशा जैन (धर्मपत्नी अखिलेश जैन) ने तीन सितंबर से 12 सितंबर तक उपवास रखा। 24 घंटे में केवल एक-दो बार पानी पीती थीं। निशा जैन ने इससे पहले भी दो बार दस दिनों का उपवास रखा था।

समापन कार्यक्रम में अध्यक्ष शांतिलाल जैन, महामंत्री रतन लाल जैन सहित सैकड़ों की संख्या में श्रावक उपस्थित थे।
      
 


संबंधित खबरें