पटना। श्रीमद्भगवद्गीता मर्मज्ञ स्वामी ज्ञानानंद ने कहा भगवद्गीता केवल द्वापर युग में ही नहीं बल्कि वर्तमान में भी प्रासंगिक है। आज सुख सुविधाएं बढ़ रही हैं, लेकिन मानसिक शांति और सद्भावनाएं कमजोर पड़ रही हैं। भगवद्गीता ऐसी समस्याओं का समाधान करनेवाला शास्त्र है।
महाराणा प्रताप भवन में श्रीमद्भगवद्गीता गीता प्रवचन का आयोजन आध्यात्मिक सत्संग समिति ने किया। व्यासपीठ पर कथाव्यास का स्वागत अभिनंदन समिति के अध्यक्ष गणेश खेतड़ीवाल, पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार किशोरपुरिया, समिति के महामंत्री रमेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष आलोक स्वरूप एवं अन्य सदस्यों ने किया।

स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कुरूक्षेत्र में जो उपदेश अर्जुन को दिया गया, आज वह समूची मानवता के लिए एक आवश्यक प्रेरणा है। जब अर्जुन मोह, शोक और विषाद से ग्रस्त होकर अपने कर्तव्य से विमुख हो गये थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश देकर अर्जुन को पुनः स्वस्थ और कर्तव्य के प्रति सजग बनाया।
आज भी गीता का यही संदेश सामने रखें, तो मानव अपने कर्तव्य को कुशलता से कर सकता है। भविष्य की चिंता में अपनी ऊर्जा नहीं बर्बाद करें। आप ही अपना मित्र और शत्रु हैं। जब मनुष्य कर्तव्य निष्ठा से न्याय करता है, तो अपने साथ मित्रता करता है। जब उसका कर्तव्य केवल निजी हित स्वार्थ तक सिमट जाता है, तो वह समग्र समाज के साथ अन्याय करता है।