पटना । फसल अवशेष प्रबंधन पर देश में पहली बार बिहार में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। पटना के ज्ञान भवन में 14 एवं 15 अक्टूबर को सम्मेलन कृषि विभाग एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के संयुक्त तत्वावधान में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे।
कृषि विभाग के सचिव एन सरवण कुमार ने बताया कि किसानों को फसल अवशेष खेत में नहीं जलाने को लेकर लगातार जागरूक किया जा रहा है। बावजूद कई जिलों में फसल कटाई के बाद अवशेष को खेत में ही जलाने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
पंजाब, राजस्थान एवं हरियाणा के वैसे किसानों को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, जो फसल अवशेष को खेतों में जलाने की जगह उसका प्रबंधन करते हैं। ये किसान अपने अनुभवों को बिहार के लगभग 400 किसानों से साझा करेंगे।
एक टन फसल अवशेष जलाने से 3 किलोग्राम पार्टिकुलेट मैटर, 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड , 1460 किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड , 199 किलोग्राम राख एवं 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित होता है।
आयोजन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, सिमेट मैक्सिको, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान, बोरलाॅग इंस्टीच्यूट ऑफ साऊथ एशिया, सीरियल्स सिस्टम इनिशिएटिव फाॅर साऊथ एशिया एवं नाबार्ड सहयोग कर रहा है।
सम्मेलन में फसल अवशेष प्रबंधन के देश-विदेश से विशेषज्ञ जुटेंगे। ऑस्ट्रेलिया से डाॅ जय क्यूमिन्स, यूएसए से डाॅ मधुर गौतम, मैक्सिको से डाॅ पीटर क्रुफ्रुड, बांग्लादेश से डाॅ महेश कुमार घटाला, फिलिपिंस से डाॅ न्यूयाॅन वान हुन, यूएसए से डाॅ एन्डु मैक्डोनाड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं पूर्व कुलपति शामिल होंगे।