पटना। बिहार सरकार काॅरपोरेट सोशल रेस्पांसबिलिटी (सीएसआर) फंड ट्रस्ट गठित करने पर विचार कर रही है। इससे कंपनी एक्ट के तहत बड़ी कंपनियों के सामाजिक दायित्व निर्वहन पर खर्च की जाने वाली दो फीसदी राशि का अधिकतर हिस्सा बिहार को मिल सकेगा।
पिछले चार वर्षों में खर्च हुए सीएसआर फंड के 8636 करोड़ में बिहार को मात्र 271 करोड़ राशि ही मिली है। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने उक्त जानकारी होटल मौर्या में आयोजित स्टेक होल्डर्स एवं इन्वेस्टर्स समिट 2019 में दी। भारत सरकार के कंपनी मामलों के मंत्रालय ने समिट का आयोजन किया था।
उन्होंने कहा कि व्यापार सुगमता (इज ऑफ डूइंग बिजनस) में भारत पांच साल में 142 से 63 वें स्थान पर आ गया है। व्यवसायी वर्ग को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत एवं बिहार सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अभी जो मंदी की बात चल रही है, वह हल्का गतिरोध है। हम इस समय को भी पार कर लेंगे।
नोटबंदी के बाद बिहार में 19 हजार खातों में दो लाख से अधिक एवं 1900 खातों में एक करोड़ से अधिक राशि जमा की गई। आयकर विभाग ऐसे खातों की जांच कर रहा है। बिहार में 5913 फर्जी एवं निष्क्रिय कंपनियों के निबंधन रद्द किये गये हैं।
जीएसटी लागू होने के बाद ढाई वर्षों में बिहार में 2 लाख 72 हजार नये रजिस्ट्रेशन हुए जबकि जीएसटी के पहले बिहार में 159721 डीलर रजिस्र्टर्ड थे। निबंधन में संदेह होने पर जांच में 90626 ऐसे करदाता मिले, जिन्होंने छह महीने से अधिक रिटर्न दाखिल ही नहीं किया। 7,368 फेक कारोबारियों के निबंधन को रद्द किया गया है। 319 कारोबारियों के परिसर के भौतिक सत्यापन में अब तक 18 फर्जी पाये गये।
समिट में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, बिहार हिमांशु शेखर, परिवहन सचिव संजय अग्रवाल, एसडी संजय, डी बंद्योपाध्याय, सीएस सुधीर कुमार समेत कई सीए एवं उद्योगपति शमिल हुए।