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बिहार के लौह उद्योग की सरकार से अपील, बिजली दर में मिले रियायत

पटना। बिजली की अधिक दर के कारण बिहार का लौह उद्योग (एचटी उपभोक्ता) गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। बाजार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए बिहार के लौह कारोबारियों की चिंता है कि कहीं कारोबार बंद करने की नौबत न आ जाये। पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ एवं झारखंड (डीवीसी कमांड क्षेत्र) में बिजली की दर कम होने के कारण इन राज्यों में लौह उत्पादों की लागत कम है। बिहार में इन राज्यों के उत्पाद आने से यहां के उद्योग को काफी परेशानी हो रही है। 

बिहार में एचटी उपभोक्ता की बिजली दर करीब 25 प्रतिशत अधिक होने के कारण उत्पादन लागत भी अधिक है। पड़ोसी राज्यों के उत्पाद कम कीमत पर बिहार के बाजार में उपलब्ध हैं। इस कारण बिहार में तैयार सामान की खपत नहीं हो पा रही है। इस उद्योग में बिजली की खपत अधिक है। एक टन माल तैयार करने में 800 से 850 यूनिट बिजली की खपत है। 

एचटी उपभोक्ता संघ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, ऊर्जा एवं उद्योग मंत्री, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव सह अध्यक्ष बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी एवं उद्योग विभाग के सचिव को दिये ज्ञापन में अपनी तकलीफ बतायी है। संघ ने पश्चिम बंगाल की व्यवस्था का अपने पत्र में जिक्र किया है। संघ का कहना है कि बंगाल में बिहार की तरह स्थिति होने पर राज्य सरकार ने 16 नवंबर 2019 को उद्योगों को बड़ी राहत दी है। 

एचटी उपभोक्ता संघ की मांग - संघ का कहना है कि उद्योग को डीवीसी रेट पर बिजली मिलनी चाहिए। बिजली बिल फिक्स चार्ज की जगह खपत के अनुसार हो। साथ ही बिजली कनेक्शन हटाने की स्थिति में 24 एवं तीन माह की नोटिस अवधि को एक माह किया जाये।      

एचटी उपभोक्ता संघ के सदस्य - पटवारी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, नील कमल स्टील, कालिंदी वेंचर्स, दादीजी स्टील, शिव शिवा स्टील, दीना आयरन एंड स्टील, मगध आयरन, दीना मेटल्स, दीना महावीर राॅलर्स, बाल मुकुंद  स्टील, गोकुल स्टील, कलजन स्टील, पटना आयरन, सिटी राॅलिंग मिल्स एवं कैंपर काॅनकास्ट।  

बीआईए एवं चैंबर भी चिंतित - राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बिहार के लौह उद्योग की स्थिति पर बिहार उद्योग संघ एवं बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री ने भी चिंता जतायी है। उन्होंने भी अपने स्तर से सरकार एवं संबंधित विभागों को आवेदन भेज उद्योग को शीघ्र राहत देने की अपील की है। 

बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा कि सरकार को लौह उद्योग की तकलीफ पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उद्योग बंद होने की स्थिति में इस काराबोर से जुड़े लोगों के समक्ष रोजगार का संकट आ जायेगा। साथ ही राजस्व की भी क्षति होगी।  

बिहार उद्योग संघ के अध्यक्ष राम लाल खेतान का कहना है कि बिहार की औद्योगिक स्थिति को देखते हुए एचटी उपभोक्ता संघ की समस्याओं का शीघ्र निराकरण होना चाहिए। लौह उद्योग का बिहार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।
     


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