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भोजन से पहले अन्नदाता का स्मरण हमारी परंपरा

बेंगलुरु । भारत में भोजन से पहले तीन बार अन्नदाता सुखी भव का उच्चारण करने की हमारी परंपरा है। जब हम इस मंत्र का उच्चारण करते हैं, तब हम तीन लोगों के प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करते हैं और उनके कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं। पहला किसान, जो हमारे लिए भोजन उगाता है। दूसरा जो आपके लिए भोजन पकाता है और तीसरा जो आपके लिए भोजन लेकर आता है और आपकी टेबल पर रखता है।

यदि एक किसान दुखी है, तो देश सुखी नहीं रह सकता है। हमें उन्हें आत्मविश्वास देने की आवश्यकता है ताकि वे चुनौतीपूर्ण समय में भी आगे बढ़ सकें। वे इस बात को जानें कि वे अकेले नहीं हैं। हमें उन्हें जीवन के प्रति विशाल दृष्टिकोण देने की जरूरत है। उन्हें इस देश के लोगों के प्रेम, देखभाल और सहायक तंत्र की आवश्यकता है। हमें किसानों को तकनीकी रूप से पोषित करना है। किसानों को तनाव मुक्त रखने में भी सहायता करनी होगी। अपनेपन की भावना और बिना शर्त प्रेम की भावना की आवश्यकता है, जिससे बदलाव आ सकता है।

कृषि मानव अस्तित्व की रीढ़ है। किसी भी सभ्यता के समृद्ध होने के लिए कृषि का स्वस्थ एवं स्थिर होना जरूरी है। हमें अपना ध्यान वापस कृषि पर केंद्रित करने की आवश्यकता है और युवाओं को कृषि के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। आज प्राकृतिक कृषि में विश्वास को फिर से जगाना होगा। यह एक मिथ्या है कि केवल महंगे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के प्रयोग से ही अच्छी फसल प्राप्त होगी। 

                                                                                                                                          -- श्री श्री रविशंकर


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