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औषधीय गुण के कारण पान पत्ते से तेल निकालने की लगेगी यूनिट  

पटना। पान के औषधीय महत्व को देखते हुए इसके पत्ते से तेल निकालने की यूनिट बिहार में लगेगी। पान की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने चालू एवं अगले वर्ष के लिए 339.66 लाख राशि स्वीकृत की है।   

पान उत्पादन के लिए नवादा, नालंदा, गया एवं मधुबनी के अलावा वैशाली, खगड़िया, दरभंगा, भागलपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, शेखपुरा, बेगुसराय, सारण, सिवान एवं मुंगेर जिलों की पहचान की गई है। 

इसके अलावा शेडनेट में पान की खेती बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के पान अनुसंधान केंद्र एवं नालंदा के इस्लामपुर में शत्-प्रतिशत अनुदान पर कराया जायेगा। पान के तेल के औषधीय महत्व के कारण पान आयल आसवन इकाई की स्थापना पान अनुसंधान केंद्र में की जायेगी।

कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार में जलवायु अधिक गर्म और ठंडा होने के कारण पान की खेती खुले खेतों में नहीं की जा सकती है। आम तौर पर किसान बरेजा के अंदर पान की खेती करते हैं। बरेजा को निर्माण बांस, पुआल एवं सुतली से बनाया जाता है। 

बरेजा के अंदर सिंचाई पर अधिक परिश्रम के साथ खर्च भी अधिक पड़ता है। फसल में रोग की भी आशंका रहती है। इसलिए शेडनेट कीे स्थायी संरचना पर जोर दिया जा रहा है। इसमें सूक्ष्म सिंचाई की व्यवस्था रहती है। किसान शेडनेट में परवल, अरवी, मिर्च, लौकी, ककड़ी, पालक एवं अदरक की मिश्रित खेती कर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
 


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