पटना। महावीर मंदिर में संत रविदास की जयंती मनायी गयी। इस अवसर पर मंदिर के प्रांगण में स्थापित संत की भव्य मूर्ति पर माल्यार्पण एवं आरती की गयी। इसमें मंदिर के मुख्य पुजारी सूर्यवंशी दास फलाहारी, रविदास सेवा समिति के डोमन दास एवं पंडित भवनाथ झा शामिल थे। रविदास सेवा समिति की देखरेख में महावीर मंदिर की ओर से शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी।
महावीर मंदिर के शोध एवं प्रकाशन प्रभारी पंडित भवनाथ झा ने बताया कि मध्यकाल में सामाजिक समरसता का एक दौर चला। इसमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने रामभक्ति की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भक्ति भाव के आधार पर सामाजिक समरसता की शिक्षा दी। इसी रामानंदाचार्य के शिष्य संत रविदास थे।

इन्होंने कर्म करते हए भगवान् की भक्ति में लीन रहने की शिक्षा दी। इनका मानना था कि हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य उस नगर को बसाना है, जहां किसी को कोई दुःख न रहे। उन्होंने बे-गम शहर की कल्पना की। इसे भारतीय दर्शन शास्त्र में दुःखातीत अवस्था कहा गया। मीरा बाई संत रविदास की शिष्या थीं। संत रविदास का जन्म बनारस के समीप माघ पूर्णिमा के दिन माना जाता है। इसी दिन इनकी जयंती मनायी जाती है।