पटना। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार मेरे पिता समान हैं। उन्होंने मेरे लिये जो भी निर्णय लिया, उसे खुशी से स्वीकार करता हूं। जदयू से बाहर होने के बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस प्रतिनिधियों से कहा कि मैं बिहार से बाहर नहीं जा रहा हूं। बिहार के विकास के लिए काम करता रहूंगा। मेरी योजना दीर्घकालीन है। 20 फरवरी से बात बिहार की शुरू कर रहा हूं।
इसके जरिये सभी पंचायतों से वैसे युवाओं की पहचान करना है, जिनमें बिहार के बदलाव की ललक हो। तीन माह में एक करोड़ युवाओं को जोड़ने के बाद आगे की रणनीति तैयार होगी। मेरा मकसद बिहार को टाॅप दस राज्यों में पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि 15 साल में बिहार में काफी काम हुआ है, लेकिन ये काम वर्तमान मानक के अनुसार नहीं हैं। बिहार अब भी कई मानकों में काफी पीेछे है। राज्य सरकार हर काम की तुलना 2005 से करती है। सरकार कर्णाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा एवं गुजरात राज्यों से तुलना क्यों नहीं करती।
हर बात में सिर्फ गरीब राज्य कहने से काम नहीं चलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार को अगले दस साल के विकास का ब्लू प्रिंट लोगों को बताना होगा। उन्होंने कहा स्कूलों में बच्चों का दाखिला बढ़ा है। बच्चों को साइकिल एवं पोशाक दी गई, लेकिन शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ा।
प्रशांत किशोर ने कहा बिहार के लोग दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं। एक समय ऐसा भी तो आये जब दूसरे राज्यों से लोग यहां काम करने आयें। बिहार को अब तक विशेष पैकेज, विशेष राज्य एवं पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं मिल सका है।