पटना। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने 2020-21 के लिए घोषित बिजली टैरिफ में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को दस पैसे प्रति यूनिट की राहत दी है। साथ ही मीटर शुल्क भी समाप्त कर दिया है। नई दर एक अप्रैल से लागू होगी। आयोग के अध्यक्ष एसके नेगी, सदस्य राजीव अमित और आरके चौधरी ने यह निर्णय दिया।
बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं बिहार उद्योग संघ (बीआईए) ने बिजली दर में एक समान रूप से कटौती का स्वागत किया है।
बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स : चैंबर अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक उपभोक्ताओं का काॅन्ट्रेक्ट डिमांड 85 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत करना, 21 घंटे से कम बिजली आपूर्ति होने पर उस महीने समानुपातिक मांग शुल्क की अनुमति एवं 33 केवी पर न्यूनतम भार की सीमा 1000 केवीए से घटाकर 500 केवीए करना एक स्वागत योग्य कदम है।
चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में बिजली दर अभी भी पड़ोसी राज्य एवं डीवीसी की तुलना में अधिक है। इससे उद्योग चलाने में कठिनाई हो रही है। आयोग की सुनवाई के क्रम में चैंबर ने सुझाव दिया था कि बिजली की खरीद दर एवं वितरण नुकसान में कमी आयी है। इस कारण बिजली दर में 15 से 20 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए । चैंबर ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि राज्य के उद्योग को पहले की तरह उचित सब्सिडी मिले। इससे राज्य के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
बीआईए : बीआईए के अध्यक्ष राम लाल खेतान ने कहा है कि राज्य में बिजली दर काफी अधिक है। इसमें और कमी लाने की जरूरत है। खासकर औद्योगिक उपभोक्ताओं की दर 8 रुपये से 12 रुपये प्रति यूनिट तक है। इस कारण बिजली की अधिक खपत वाले उद्योगों को चलाने में काफी परेशानी हो रही है। न्यूनतम काॅन्ट्रेक्ट डिमांड में कमी स्वागत योग्य है। इससे औद्योगिक उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलेगी। बीआईए ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि उद्योगों को बचाने के लिए कम से कम एक रुपये प्रति यूनिट की दर से अनुदान देने की व्यवस्था की जाये।