पटना। बिहार में फसलों की पहचान कर उन्हें क्लस्टर के रूप में विकसित करने की तैयारी कृषि विभाग ने शुरू कर दी है। इससे किसानों को उनके उत्पाद के बेहतर मूल्य के साथ बिहार लौटे श्रमिकों को रोजगार मिल सकेगा।
कृषि उत्पाद आधारित लघु उद्योगों की स्थापना के लिए बिहार उद्यानिक उत्पाद विकास कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2019-20 से शुरू है। लघु उद्योगों की स्थापना के लिए 10 लाख राशि निर्धारित की गई है। लाभार्थी को 90 प्रतिशत अनुदान यानी नौ लाख रुपये की सहायता मिलेगी।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत आम के लिए पटना, भागलपुर, दरभंगा एवं सहरसा जिलों को चिह्नित किया गया है। टमाटर के लिए रोहतास, हरी मिर्च के लिए अररिया एवं समस्तीपुर, लहसुन के लिए मोतिहारी, हल्दी के लिए बेतिया एवं मटर के लिए आरा की पहचान की गई है।
इसी तरह किशनगंज में अनानास, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सीतामढ़ी एवं शिवहर में लीची, कटिहार एवं खगड़िया में केला, शेखपुरा एवं बक्सर में प्याज, नालंदा में आलू, कैमूर में अमरूद, वैशाली में शहद एवं गया में पपीता फसल के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जायेगा।
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि बिहार उद्यानिक उत्पाद विकास कार्यक्रम के अंतर्गत संबंधित फसल क्षेत्रों को क्लस्टर के रूप में चिह्नित किया जायेगा। एक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर रकवा शामिल होगा। चिह्नित क्लस्टर में शामिल सभी कृषकों का एक समूह बना उसका रजिस्ट्रेशन होगा। समूह के प्रत्येक सदस्य को विभिन्न एक्टिविटी के लिए ट्रेनिंग दी जायेगी।