पटना। आत्मनिर्भर भारत आर्थिक पैकेज के तहत एमएसएमई को लोन देने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है। इस संबंध में बैंकों से मिलने वाले कर्ज पर स्टांप ड्यूटी को कम करने का आग्रह बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने किया है। चैंबर ने इस संबंध में एक टोकन राशि निर्धारित करने की अपील राज्य सरकार से की है ।
चैंबर अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने बताया कि लोन के लिए पहले की तरह एक निश्चित राशि (टोकन एकाउंट) का निर्धारण होने से अधिक एमएसएमई इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। लोन देने के समय बैंक हाइपोथिकेसन एग्रीमेंट कराते हैं। इसमें लोन राशि का 290 रुपये प्रति लाख की दर से स्टांप ड्यूटी लगाया जाता है। यदि लोन राशि एक करोड़ की है, तो उस पर 29000 रुपया का स्टांप ड्यूटी देना पड़ेगा। यह छोटे उद्यमियों के लिए उपयुक्त नहीं होगा।
इसके अलावा भी बैंक कई डाॅक्यूमेंट बनवाते हैं और उन पर भी स्टांप ड्यूटी अलग से लगता है। एग्रीमेंट पर एक हजार रुपये का, गारंटी पर दो हजार, बाॅरोअर पीडीआर पर एक हजार एवं गारंटर पीडीआर पर एक हजार रुपये का स्टांप शुल्क देना पड़ता है।
लाॅकडाउन से प्रभावित देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को उबारने के लिए केंद्र सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये के पैकेज के तहत ऑटोमेटिक लोन की सुविधा बिना किसी गारंटी के देने का निर्णय लिया है। इसमें प्रावधान किया गया है कि 29 फरवरी 2020 को बैंक का लोन आउटस्टैंडिग चाहे वह टर्म लोन में हो या वर्किंग कैपिटल या कोई अन्य लोन एकाउंट। सभी को मिलकार उसकी बीस प्रतिशत राशि कर्ज के रूप में एमएसएमई को दी जायेगी।
मिलने वाली राशि पर ब्याज की दर बैंकों से लिए जानेवाले अन्य कर्ज की तुलना में कम होगी। इस लोन का वर्किंग कैपिटल टर्म लोन एकाउंट के अन्तर्गत एक साल का अधिस्थगन अवधि के बाद चार साल में भुगतान करना है ।