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उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी व आयकर में छूट दे केंद्र : सीएम

पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में उद्योग की कमी है। इसे बढ़ावा देने के लिए विशेष सहायता के रूप में जीएसटी और आयकर में केंद्र सरकार छूट दे। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए आवंटित 25 हजार करोड़ की राशि बढ़ाने की जरूरत है। इससे बिहार जैसे राज्य में एमएसएमई को बढ़ावा मिलने के साथ लोगों को अधिक से अधिक काम भी मिलेगा। 

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली से छह राज्यों के 116 जिलों के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान का शुभारंभ किया। देश में बिहार के खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड की तेलिहार पंचायत से अभियान की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शामिल हुए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में हमने सुझाव दिया है कि एनुअल क्रेडिट प्लान को बढ़ाएं। राज्य का क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो मात्र 43 प्रतिशत है। इसे भी बढ़ाने की जरूरत है। बिहार के बैंकों में यहां के लोगों का काफी पैसा जमा होता है। बैंक इस पैसे को दूसरे राज्यों में निवेश करते हैं। 

सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार का गरीब कल्याण रोजगार अभियान बाहर से लौटे लोग और ग्रामीणों को आजीविका का अवसर प्रदान करेगा। इसमें बिहार के 32 जिलों को शामिल किया गया है। योजना के अंतर्गत उन जिलों को शामिल किया गया है, जहां बाहर से 25 हजार या उससे अधिक लोग वापस आये हैं। 

योजना के अंतर्गत 25 कार्य क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसकी कार्य अवधि भी 125 दिनों की है। केंद्र सरकार इस पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। अभियान के तहत एक पंचायत में 3 करोड़ 43 लाख रुपये व्यय की जा रही है। 

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार भी अपनी तरफ से तेलिहार पंचायत में 2 करोड़ 30 लाख रुपये की योजना शुरू कर रही है। लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है। मनरेगा, सड़क निर्माण, अन्य विकास कार्य, सात निश्चय एवं जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। 

पर्यावरण संरक्षण के लिए जल-जीवन-हरियाली अभियान पर तीन वर्ष में 24,000 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब तक 9.50 लाख जीविका का गठन किया गया और इससे 1 करोड़ से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। बाहर से आये 41 हजार परिवारों को भी जीविका से जोड़ा गया है। हमारा लक्ष्य 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का है।
 


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