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औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी 

पटना। बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 में संशोधन कर इसे पांच साल के लिए 31 मार्च 2025 तक के लिए प्रभावी किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 

बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2020 में राज्य के बाहर स्थित उद्योग के बिहार में स्थानांतरण के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाया गया है। यह पैकेज एक साल के लिए है। पैकेज के तहत प्लांट और मशीन के स्थानांतरण, स्थापना एवं कच्चे माल पर व्यय राशि का 80 प्रतिशत राज्य सरकार देगी। साथ ही इपीएफ पर एक साल के लिए कर्मी एवं नियोक्ता के 12 प्रतिशत तक अंशदान भी सरकार देगी। 

राज्य के एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी सामान की खरीद नीति में बदलाव किया गया है। सामान की खरीद राज्य स्थित यूनिट से ही की जायेगी।

नीति अंतर्गत उच्च प्राथमिकता कोटि में कई प्रक्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें दो पहिया, तीन पहिया ई रिक्शा का निर्माण, इथनाॅल उत्पादन, दाल प्रसंस्करण यूनिट, मशाला एवं जड़ी बूटी, यार्न उत्पादन, रंगाई एवं छपाई (टेक्सटाइल, अपैरल एवं चमड़ा) हैं।

लकड़ी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार गंभीर है। इसके अंतर्गत लुगदी एवं कागज, दियासलाई, टिम्बर एवं चिरान, प्लाईवुड, प्लाईबोर्ड, लेमिनेट एवं विनीयर, बांस एवं पार्टिकल बोर्ड से संबंधित उद्योग शामिल हैं।

संशोधित नीति में अन्य कई प्रक्षेत्रों को भी जगह दी गई है। इनमें ड्राई वेयरहाउस, कोल्डचेन, बोटलिंग यूनिट, टिसू कल्चर लैब, क्राॅप केयर केमिकल यूनिट, गैर कृषि संयंत्र, इलेक्ट्रिक जेनरेटर, ट्रांसफाॅर्मर, इलेक्ट्रिक लाइटिंग उपकरण, आईटी, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्राॅनिक उपकरण, फ्लाई ऐश ब्रिक्स, एएसी ब्लाॅक, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण, आभूषण एवं खेलकूद निर्माण से संबंधित प्रक्षेत्र हैं। 

कोविड-19 के कारण बाहर से लौटे श्रमिकों के स्कील मैपिंग के आधार पर रोजगार सृजन की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए प्रत्येक जिला में सात कलस्टर का निर्माण किया जायेगा। 
 


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