वैशाली/पटना। महापर्व पर्युषण के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की पूजा हुई। जैन समाज के एम.पी. जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व में बताया जाता है कि आत्मा के दस स्वभाव पर कैसे विजय प्राप्त किया जाये। पर्युषण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच दिवस है। व्यक्ति का लोभ पर विजय प्राप्त करना ही शौच धर्म कहलाता है।
शौच धर्म पवित्रता का प्रतीक है। यह पवित्रता संतोष के माध्यम से आती है। व्यक्ति शौच धर्म से लोभ पर विजय प्राप्त करता है। लोभ कई तरह का होता है जैसे धन, यश एवं इंद्रियों का लोभ। आत्मा की शुद्धि के मार्ग में लोभ सबसे बड़ा अवरोधक है। लोभ के कारण ही हमारा असंतोष बढ़ता है। यह हमारे सभी सद्गुणों को नष्ट कर देता है।
वासोकुंड से जैन मुनि आचार्य रत्न विशुद्ध सागर जी ने बताया कि इतना कमाओ कि स्वयं का पेट भरता रहे और साधु भी दरवाजे से भूखा न जाए। किसी भी वस्तु का लोभ नहीं होना चाहिए। जैन साधु के पास पिच्छि कमंडल और जिनवानी के अतिरिक्त कुछ भी नहीं होना चाहिए।

एम.पी.जैन ने बताया कि सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए इस वर्ष किसी भी दिगंबर जैन मंदिर में पर्व का आयोजन नहीं रहो हा है। श्रद्धालु अपने घरों में ही पूजा कर रहे हैं। पर्युषण पर्व पर जैन मंदिरों में शांतिधारा श्रद्धालुओं के नाम से पुजारी कर रहे हैं।
मीठापुर दिगंबर जैन मंदिर में शांतिधारा नेमीचंद संजय कुमार जैन कासलीवाल एवं संध्या आरती ताराचंद जय कुमार जैन छाबड़ा की ओर से किया गया। अध्यक्ष विजय जैन कासलीवाल ने दर्शन किया। मुरादपुर दिगंबर जैन मंदिर में शांतिधारा की गयी। कांग्रेस मैदान स्थित दिगंबर जैन मंदिर के महासचिव कैलाश चंद जैन ने बताया कि सरकारी निर्देश में भगवान की पूजा हो रही है।