पटना। दस दिवसीय महापर्व पर्युषण के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा हुई। जैन समाज के एम.पी.जैन ने बताया कि आज भगवान् वासुपूज्य का मोक्ष कल्याण दिवस भी है। इसे श्रावक श्रद्धापूर्वक मनाते हैं एवं भगवान् वासुपूज्य को लड्डू चढ़ाते हैं।
उन्होंने बताया कि ब्रह्म स्वरुप आत्मा की चर्या का नाम ब्रह्मचर्य है। आत्मिक सुख भोगना और प्रसन्न रहना ही ब्रह्मचर्य है। ब्रह्मचर्य धर्म के पालन से शरीर ढृढ़ एवं ज्ञान की वृद्धि होती है। विषय वासनाओं में लीन मनुष्य धर्म के तत्व को नहीं पहचान पाता है। काम वासना पर विजय प्राप्त करना अत्यंत कठिन कार्य है।
सामान्य व्यक्ति अपने जीवन से काम और वासना को निर्मूल नहीं कर पाता है। मुनि एवं तपस्वी काम और वासना को निर्मूल कर उग्र ब्रह्मचर्य व्रत को धारण करते हैं। कांग्रेस मैदान के पास स्थित जैन मंदिर में भगवान को लड्डू चढ़ाया गया। पुजारी विकास जैन, जिनेश जैन, अजित जैन गंगवाल, अनिल गंगवाल, सन्नी जैन, अशोक छाबड़ा एवं दीपक छाबड़ा ने प्रसाद चढ़ाया। मुरादपुर जैन मंदिर में पुजारी सुबोध जैन फंटी ने शांतिधारा किया एवं लड्डू चढ़ाया।

मीठापुर दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण के अंतिम दिन शांतिधारा विजय कुमार, राहुल कुमार जैन कासलीवाल की ओर से किया गया। वासुपूज्य भगवान् के मोक्ष कल्याणक पर लड्डू प्रेमलता, इंद्रा, राजू, अंजू, नीलम, सुनीता एवं अनिता जैन ने चढ़ाया। फूलमाला विजय कुमार, उज्ज्वल कुमार जैन पाटनी एवं संध्या आरती विनोद कुमार, यमन कुमार जैन पहाड़िया ने किया।