नई दिल्ली। सेंटर फाॅर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) की शहद शुद्धता जांच में 77 फीसदी नमूनों में शुगर सिरप के साथ अन्य मिलावट पाए गए। 13 कंपनियों के नमूनों में सिर्फ सफोला, मार्कफेड सोहना और नेचर्स नेक्टर ब्रांड ही सभी परीक्षणों में पास हो सके। एनएमआर टेस्ट में शहद के प्रमुख ब्रांड डाबर, पतंजलि, झंडु, एपिस हिमालय और हितकारी फेल हो गए।
भारत से निर्यात किए जाने वाले शहद का एनएमआर परीक्षण एक अगस्त, 2020 से अनिवार्य कर दिया गया है। न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनएमआर) परीक्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है।
शहद की शुद्धता की जांच के लिए तय भारतीय मानकों के जरिए मिलावट को नहीं पकड़ा जा सकता है। चीन की कंपनियां ऐसे शुगर सिरप तैयार कर रही हैं, जो भारतीय जांच मानकों पर आसानी से खरे उतरते हैं। भारत और जर्मनी की प्रयोगशाला अध्ययनों पर आधारित सीएसई की यह गहरी पड़ताल बताती है कि भारत के सभी प्रमुख ब्रांड के शहद में जबरदस्त मिलावट की जा रही है।
सीएसई की पड़ताल : सीएसई ने भारतीय बाजार में बिकने वाले 13 बड़े और छोटे ब्रांड वाले प्रोसेस्ड शहद को चुना। इन नमूनों को सबसे पहले गुजरात के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) स्थित सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड (सीएएलएफ) में जांचा गया।
एपिस हिमालय को छोड़कर लगभग सभी शीर्ष ब्रांड शुद्धता परीक्षण में पास हो गए। कुछ छोटे ब्रांड इस परीक्षण में फेल हुए। उनमें सी 3 और सी 4 शुगर पाया गया। यह शुगर चावल और गन्ने के हैं। जब इन्हीं ब्रांड्स को न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण पर परखा गया, तो लगभग सभी ब्रांड के नमूने फेल हो गए। एनएमआर परीक्षण वैश्विक स्तर पर मोडिफाई शुगर सिरप को जांचने के लिए प्रयोग किया जाता है। 13 ब्रांड में सिर्फ तीन ही एनएमआर परीक्षण में पास हो पाए। इन्हें जर्मनी की विशेष प्रयोगशाला में जांचा गया था।
सेंटर फाॅर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) की सुनीता नारायण ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है। हम जानते हैं कि शहद में जीवाणुरोधी और सूजन को कम करने वाले गुण होते हैं। इसलिए प्रत्येक घर में शहद को अच्छाई की खान मानकर अधिक सेवन किया जा रहा है।
हमारे शोध ने पाया है कि बाजार में बिकने वाले अधिकतर शहद मिलावटी हैं। उनमें शुगर सिरप मिलाया गया है। लोग शहद की जगह अनजाने में अत्यधिक चीनी का सेवन कर रहे हैं। यह कोविड-19 के जोखिम को बढ़ाने के साथ मोटे लोगों में जानलेवा संक्रमणों को बढ़ा देता है।