पटना। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पटना, गया और मुजफ्फरपुर के मास्टर प्लान एरिया में में 22 नए उद्योग लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पर्षद की अधिसूचना में कहा गया है कि मास्टर प्लान क्षेत्र में पहले से कार्यरत उद्योगों को रिन्यूअल की स्थिति में पहले से अधिक कठोर मानकों का पालन करना होगा। ऐसा नहीं होने पर पर्यावरण संबंधित कानून के तहत कार्रवाई होगी।
पर्षद के अध्यक्ष अशोक कुमार घोष ने कहा है कि तीनों जिलों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए नए उद्योग लगाने पर प्रतिबंध का निर्णय लिया गया है। निर्णय लेने से पहले राज्य स्तर पर कई बार बैठक की गई। इस आधार पर पटना के मास्टर प्लान एवं मुजफ्फरपुर और गया के प्लानिंग एरिया में प्रदूषण फैलाने वाले 22 तरह के नए उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है।
बीआईए की प्रतिक्रिया : बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने कहा है कि औद्योगिक रूप से पिछड़े बिहार में रोजगार के नए अवसर सृजित करना एक बड़ी चुनौती है। इस परिपेक्ष्य में राज्य के औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण तीन जिलों में 22 तरह के उद्योगों की स्थापना पर प्रतिबंध लगाने से औद्योगिकरण की गति प्रभावित होगी।
यह प्रतिबंध मास्टर प्लान के क्षेत्र तक सीमित रखा गया है। अतः जरूरत है कि राज्य सरकार और बियाडा इन जिलों में मास्टर प्लान के लिए चिन्हित जगह के बाहर नये इंडस्ट्रियल एरिया की स्थापना कर उद्योगों के लिए जगह मुहैया कराये। साथ ही पहले से स्थापित इंडस्ट्रियल एरिया जो अधिसूचना के बाद प्रतिबंधित क्षेत्र में आ गये हैं। उनमें सेवा क्षेत्र की औद्योगिक इकाईयों की स्थापना के लिए अनुमति प्रदान करनी चाहिए। सेवा क्षेत्र की इकाईयां स्थापित होने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा प्रदूषण की समस्या भी नहीं रहेगी।
प्रदूषण कमिटी के जी.पी.सिंह ने कहा कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पहले से संचालित औद्योगिक इकाईयों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी लाइसेंस के रिन्यूअल में कोई असुविधा नहीं हो। यदि कोई परेशानी होती है, तो औद्योगिक इकाईयों के बंद होने से बेरोजगारी और एनपीए जैसी समस्याएं आएंगी।