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बिहार में बिजली दर झारखंड एवं बंगाल की तरह हो : चैंबर ऑफ काॅमर्स 

पटना। राज्य में औद्योगिकरण को बढ़ाने के लिए बिजली दर को पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल एवं झारखंड के समतुल्य या कम करने की मांग बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने की है। चैंबर ने इस सबंध में ऊर्जा मंत्री, ऊर्जा सचिव, बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी, नाॅर्थ एवं साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को पत्र लिखा है। 

बिजली दर में संशोधन की मांग बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स एवं बिहार उद्योग संघ लगातार उठाता रहा है। चैंबर अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से पिछले कई वर्षों से यह प्रयास हो रहा है कि राज्य में औद्योगिकरण का विकास हो, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। इसकी एक बड़ी वजह पड़ोसी राज्यों की तुलना में बिहार में बिजली की कीमत में भारी अंतर है। 

डीवीसी क्षेत्र में बिजली की दर 3.50 रुपये प्रति यूनिट है। डीवीसी की दर के अनुसार पश्चिम बंगाल बिजली बोर्ड एवं झारखंड बिजली बोर्ड औद्योगिक बिजली बेच रहे हैं। बिहार में एचटी उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर लगभग 8.50 रुपये प्रति यूनिट है। इस कारण उद्यमी अपनी यूनिट को पश्चिम बंगाल एवं झारखंड में लगा रहे हैं ।     

चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में बिजली की दर अधिक होने के कारण निर्माण क्षेत्र में लगे उद्यमियों का उत्पादन लागत अधिक होता है। इस कारण यहां के उद्यमी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल एवं झारखंड के साथ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं । 

एचटी उपभोक्ताओं के लिए उच्च दर का मुख्य कारण क्राॅस सब्सिडी है। कुल बिजली का 13 प्रतिशत एचटी उपभोक्ताओं को एवं 87 प्रतिशत खुदरा एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को बेचा जाता है। एचटी आपूर्ति में खपत कम है। इसलिए क्राॅस सब्सिडी बहुत अधिक हो जाती है। यदि एक बार बिजली की दर प्रतिस्पर्धी हो जाएगी, तो औद्योगिक विकास होगा, एचटी आपूर्ति बढ़ेगी और क्राॅस सब्सिडी कम होगी ।

कोविड-19 महामारी के कारण लगभग सभी काॅमर्शियल एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान ठीक से नहीं चले। इसके बावजूद बिजली का उपयोग किए बिना उन्हें पहले की खपत के अनुसार फिक्स चार्ज देना पड़ा है। 

चैंबर ने मांग की है कि टैरिफ में ऐसा प्रावधान करना चाहिए कि प्राकृतिक आपदा एवं महामारी जैसी परिस्थितियों में यदि काॅमर्शियल एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद रहते हैं, तो उन्हें फिक्स चार्ज के भुगतान से छूट मिले। 


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