पटना। मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी (गुरुवार) को ही मनाई जाएगी। इस दिन दोपहर 2ः37 बजे सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होगा। इस समय को संक्रमण काल कहते हैं। इसके बाद पुण्यकाल होगा। शास्त्रानुसार पूरे दिन को पुण्याह कहा जाता है।
महावीर मंदिर के पंडित भवनाथ झा ने बताया कि धर्मशास्त्र का नियम है कि यदि सूर्यास्त के पहले संक्रमण हो रहा हो, तो उसी दिन संक्रांति का पुण्यकाल होता है। जिस दिन मकर संक्रांति होती है, उसी दिन सुबह में स्नान का मुहूर्त होता है, लेकिन दान का सबसे उत्तम मुहूर्त 2ः37 के बाद होगा।
मकर संक्रांति में तिल, गुड़, चूड़ा एवं दही का दान प्रशस्त माना गया है। लोग स्वयं भी इस वस्तुओं का उपयोग करें एवं दूसरों को भी दें। इस दिन पारंपरिक रूप से खिचड़ी खायी जाती है। यद्यपि इस बार गुरुवार का दिन है और कहीं-कहीं खिचड़ी नहीं खाने की परंपरा है। मकर संक्रांति विशेष दिन है। यहां सामान्य दिनों की तरह निषेध लागू नहीं होता है। इस तरह गुरुवार होने पर भी खिचड़ी खाने में दोष नहीं है।
शास्त्र के अनसार इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं। ज्योतिष तथा पुराणों में मनुष्य के एक वर्ष को देवताओं का एक दिन माना गया है। इसमें मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष एवं मिथुन राशियों के सूर्य को उत्तरायण का सूर्य यानी देवताओं का दिन माना गया है, जो यज्ञ आदि के लिए प्रशस्त है। कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक एवं धनु राशियों में सूर्य दक्षिणायन अर्थात् देवताओं की रात का समय माना गया हैं। दक्षिणायन में सूर्य के रहने पर यज्ञ कार्य नहीं होते हैं।
पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से देवताओं के दिन का आरंभ माना जाता है। अतः पूरे दिन प्रातःकाल का जो आध्यात्मिक महत्व है, वहीं महत्व पूरे वर्ष मकर संक्रांति के दिन का होता है।