पटना। बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति (बीएआईपीपी) की ऑनलाईन आवेदन प्रणाली का शुभारंभ कृषि, सहकारिता एवं गन्ना उद्योग मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने किया। बिहार में इस नीति को कृषि विभाग का उद्यान निदेशालय संचालित कर रहा है। किसानों की आय वृद्धि एवं नियोजन के अवसर सृजित करने के लिए एक सितंबर, 2020 से बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति लागू की गई है।
कृषि विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने कहा कि बीएआईपीपी में पात्रता रखने वाले व्यक्तिगत निवेशकों के लिए परियोजना लागत का 15 प्रतिशत एवं किसान उत्पादक कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड पूंजीगत अनुदान का प्रावधान है। इस नीति के अंतर्गत अनुदान के लिए सात सेक्टर मखाना, फल एवं सब्जी, मधु, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, मक्का, बीज एवं चाय चिन्हित किये गये हैं।
प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत निवेशक न्यूनतम 25 लाख एवं अधिकतम पांच करोड़ रुपये की लागत वाली प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना, आधुनिकीकरण, विस्तार एवं अन्य परियोजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। एससी, एसटी एवं अति पिछड़ा वर्ग के निवेशकों के लिए पांच प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान है। साथ ही महिला उद्यमी, दिव्यांग, शहीद के परिवार, एसिड अटैक पीड़ित एवं थर्ड जेंडर के उद्यमियों के लिए दो प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान है।
निवेशकों को इस नीति के तहत सात केंद्रित क्षेत्रों में पूंजीगत अनुदान के अतिरिक्त पहले से लागू बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (बीआईआईपीपी) 2016 का भी लाभ मिलेगा। इस लाभ में ऋण ब्याज अनुदान एवं जीएसटी प्रतिपूर्ति शामिल है। जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारी उद्यान सहायक निदेशक हैं। निदेशालय ने निवेशकों की सहायता के लिए एक तकनीकी सहायता समूह का गठन किया है।
कृषि सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए बीएआईपीपी के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उद्यान निदेशक नंद किशोर ने कहा कि उद्यान निदेशालय कृषि निवेशकों को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर कृषि निदेशक आदेश तितरमारे, विशेष सचिव विजय कुमार, संयुक्त सचिव शैलेंद्र कुमार समेत कई कृषि अधिकारी मौजूद थे।