पटना। केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश होने जा रहा है। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने राज्य के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास के लिए अपने सुझावों को वित्त मंत्रालय को भेजा है।
चैंबर के सुझावों में कहा गया है कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के तर्ज पर बिहार के लिए एक विशेष पैकेज एवं करों में छूट दी जानी चाहिए।
-- आयकर की धारा 80 IB को राज्य में फिर से बहाल किया जाये। पूर्व में राज्य के 26 जिलों में यह छूट दी गई थी, जिसे एक अप्रैल 2014 से वापस ले लिया गया। इससे राज्य में स्थापित नई इकाईयों को तीन से पांच साल का टैक्स छूट मिल सकेगा।
-- उत्तर बिहार में तेजी से औद्योगिकरण के लिए नाॅर्थ बिहार को गैस पाइपलाइन से जोड़ा जाए।
-- शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए करों में छूट मिले।
-- पटना एम्स में सुविधाएं बढ़े। प्रारंभिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने एवं बेहतर सुविधाओं के लिए प्रावधान होना चाहिए।
-- राज्य में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र की बुनियादी ढांचाओं के विकास के लिए विशेष प्रावधान हो।
-- राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधा एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करने की जरूरत है।
-- जीएसटी के अच्छे जानकार नहीं रहने के कारण छोटे-छोटे व्यापारियों को जीएसटी का अनुपालन करना कठिन और महंगा हो गया है। इसलिए सरकार की ओर से विशेष रियायत दी जानी चाहिए। ब्लॉक एवं पंचायत स्तर पर जीएसटी मित्रों का गठन होना चाहिए।
-- GSTR -3B का फिर से पुनार्वलोकन करने की जरूरत है।
-- प्रत्यक्ष कर में भी संशोधन होना चाहिए।
-- बिहार में कॉमर्शियल बैंकों का कम से कम एक प्रधान कार्यालय हो। इससे बिहार के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी।
-- बिहार एवं झारखंड के करदाताओं के आयकर से संबंधित विवादों के लिए इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन एवं कंपनी से संबंधित विवादों के निष्पादन के लिए एनसीएलटी की एक बेंच पटना में स्थापित करायी जाए।
-- अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता इंडस्ट्रियल कोरिडोर भारत के आर्थिक विकास में एक अहम् भूमिका का निर्वहन करेगा। यह बिहार सहित सात राज्यों को कवर करेगा। इस साल के बजट में बिहार के इस कोरिडोर के मार्ग में 2000 एकड़ में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।