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लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण

पटना। बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी वर्ष पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि प्रजातंत्र में जनता मालिक है। सभी विधायक जनता के प्रतिनिधि हैं और सरकार में बैठे लोग जनता के सेवक। सदस्यों का कर्तव्य है कि अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन की कार्यवाही में रखें। सरकार आप सभी को आश्वस्त करती है कि जो भी सार्थक प्रश्न होगा। उसका जरूर समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। जनता की समस्याओं को दूर करना हमारा कर्तव्य है। सेवा ही हमारा धर्म है। आज कई जनप्रतिनिधियों ने जो बातें कही हैं, उन पर ध्यान देना जरूरी है। विधानसभा शताब्दी वर्ष (7 फरवरी,1921) समारोह पूरे साल चलेगा। इस समारोह में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी शामिल होंगे। 

उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यक्रम में एक दिन पूर्व विधायक एवं विधान पार्षदों को भी आमंत्रित किया जाए। इससे उनके अनुभवों को सुनने का मौका मिलेगा। नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधि भी कई बातों को जान सकेंगे। आज कुछ सदस्यों ने विधानमंडल सत्र की अवधि बढ़ाने की बात की है। इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति को निर्णय लेना चाहिए ताकि सदस्य अधिक से अधिक सवाल सदन के समक्ष रखें और उनका समाधान हो सके। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद डॉ श्रीकृष्ण सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह एवं जननायक कर्पूरी ठाकुर जैसी विभूतियों ने बिहार को आगे बढ़ाया है। बिहार आगे बढ़ रहा है और आगे बढ़ता रहेगा। हमलोग राजनीतिक तौर पर अलग हैं, लेकिन मिलकर काम करना है। कोरोना वैक्सीनेशन का पहला फेज चल रहा है। दूसरा फेज भी जल्द शुरू होगा। बिहार में अन्य राज्यों की तुलना में कोरोना संक्रमण की दर कम है, फिर भी हमलोगों को सतर्क और सजग रहना है। 

कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद एवं रेणु देवी, संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधान पार्षद डॉ रामचंद्र पूर्वे, विधायक अजीत शर्मा, अवध बिहारी चौधरी, विजय शंकर दूबे, महबूब आलम, अख्तरुल ईमान, रामरतन सिंह एवं अजय कुमार ने भी संबोधित किया।


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