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निजी क्षेत्र को एमएसपी पर खरीद के लिए नहीं किया जा सकता बाध्य 

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कोई भी सरकार निजी क्षेत्र को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए बाध्य नहीं कर सकती है। किसान आंदोलन के परिपेक्ष्य में उन्होंने बताया कि यदि किसानों की मांग के अनुसार एमएसपी को कानूनी आधार दिया जाये, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर 11 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा। 

वर्तमान में केवल 23 कृषि उत्पाद को एमएसपी की परिधि में रखा गया है। इनमें केवल छह प्रतिशत की ही खरीदारी एमएसपी पर जबकि 94 प्रतिशत की बिक्री खुले बाजार में होती है। पूर्व उपमुख्यमंत्री बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन की ओर से ‘कृषि और विकास’ विषय पर देशरत्न डाॅ राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि डाॅ राजेंद्र प्रसाद की चिंतन का ही परिणाम था कि आजादी के पहले देश का पहला गौशाला एक्ट बिहार में बना। बाद में पटना के सदाकत आश्रम एवं बिहटा में माॅडल गौशाला की स्थापना की गई। 

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने खाद्य, फर्टिलाइजर, पीएम किसान, फसल बीमा एवं ब्याज अनुदान तौर पर वर्ष 2020-21 में किसानों को 6 लाख 56 हजार करोड़ अनुदान के तौर पर दिया है। एफसीआई के गोदाम में क्षमता से ढाई गुना अधिक अनाज भरे हैं। वर्ष 2000 तक जहां पंजाब प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में पहले स्थान पर था, वह अब 13वें स्थान पर है। खेती की विविधता अपनाए बिना केवल धान एवं गेहूं की खेती से किसानों की आय को नहीं बढ़ाया जा सकता है।  

1990 तक भारत और चीन की प्रति व्यक्ति आय लगभग समान थी, लेकिन आज चीन की आय भारत से पांच गुना अधिक है। इसकी वजह यह है कि चीन ने 1976 में ही आर्थिक एवं कृषि सुधार शुरू कर दिया। इस कारण अगले छह साल में ही वह किसानों की आय दोगुनी करने में सफल रहा। केंद्र सरकार ने भी अगले पांच साल में किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। उसे कृषि में सुधार करके ही हासिल किया जा सकेगा। 

केंद्र में पहले की सरकार की गलत नीतियों की वजह से धान की फसल के लिए पानी की प्रचूरता वाले बिहार एवं बंगाल की जगह पंजाब को प्रोत्साहित किया गया। वहां के किसान खेती की विविधता को न अपना कर अपने खेत के 85 प्रतिशत हिस्से में केवल धान एवं गेहूं की खेती करने लगे। वहां जमीनी पानी का अंधाधुंध दोहन और फर्टिलाइजर का अनियंत्रित उपयोग शुरू हुआ। इसके कारण आज वहां भूजल स्तर 350 से 400 फीट नीचे चला गया है। रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग के कारण पीने के शुद्ध पानी का संकट गहराने के साथ पंजाब को रेगिस्तान बनने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

स्मृति व्याख्यान में पदमश्री विमल कुमार जैन, वनवंधु परिषद के अध्यक्ष राधे श्याम बंसल, महिला उद्योग संघ की अध्यक्ष उषा झा, पीएचडी चैंबर ऑफ काॅमर्स के सत्यजीत कुमार सिंह मौजूद थे। बीआईए के अध्यक्ष राम लाल खेतान, बीआईए के उपाध्यक्ष संजय भरतिया एवं ओपी सिंह, पूर्व अध्यक्ष केपीएस केशरी एवं अरुण अग्रवाल, मनीष तिवारी, जीपी सिंह एवं बीएन चौबे भी उपस्थित थे। 
 


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