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स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना शुरू

पटना। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत उद्योग विभाग ने विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की है। इसका उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। राज्य के युवा एवं महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से लोन मिलने में परेशानी होती है। कोलेटरल सिक्यूरिटी एवं मार्जिन मनी के लिए राशि नहीं होने के कारण लोन स्वीकृत नहीं हो पाता है। इसी परेशानी को देखते हुए योजना लागू की गई है। ट्रांसजेंडर को भी योजना का समान लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का उद्देश्य राज्य के युवा एवं महिलाओं में स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना है। 

उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा के अनुसार योजना का कार्यान्वयन बिहार स्टार्ट अप फंड ट्रस्ट से किया जाएगा। इसके अंतर्गत सिर्फ नए उद्योगों की स्थापना के लिए राशि दी जाएगी। इन्हें बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 का भी लाभ मिलेगा।  

उद्योग लगाने वाले लाभुकों को कुल परियोजना लागत का पचास प्रतिशत (अधिकतम पांच लाख) लोन मिलेगा। लोन के लिए अधिकतम परियोजना लागत दस लाख रुपए है और वसूली 84 किश्तों में होगी। योजना की शेष पचास प्रतिशत राशि (अधिकतम पांच लाख) सब्सिडी के रूप में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक लाभुक के प्रशिक्षण एवं अन्य मद में 25000 रुपए भी व्यय किया जाएगा। 

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों को वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ऑनलाइन आवेदन देना होगा। लक्ष्य के अनुरूप आवेदन नहीं मिलने पर वित्तीय वर्ष की दूसरी एवं तीसरी तिमाही में भी आवेदन लिया जाएगा। तिमाही की समाप्ति के 15 दिनों के अंदर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चयन समिति प्रारंभिक जांच किए गए आवेदनों की सूची जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को भौतिक सत्यापन के लिए भेजेगी। 

इसके बाद तकनीकी विकास निदेशालय चयनित लाभुकों को प्रशिक्षण एवं डीपीआर बनाने के लिए सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों में दो सप्ताह के लिए भेजेगा। प्रशिक्षण के बाद चयन समिति डीपीआर के अनुसार परियोजना की राशि स्वीकृत करेगी।         


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