मुख्य समाचार

बिहार की मशहूर शाही लीची पहली बार भेजी गई लंदन 

पटना। बिहार से पहली बार 500 किलोग्राम शाही लीची लंदन निर्यात की गई। इससे पहले 750 किलोग्राम लीची दुबई भेजने की कोशिश हुई, लेकिन असामयिक बारिश के कारण सफलता नहीं मिली । विभाग इसे 26 मई को फिर से दुबई भेजने की कोशिश में जुटा है।

राज्य सरकार के कृषि विभाग एवं कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के संयुक्त प्रयास से मुजफ्फरपुर के भौगोलिक (जीआई ) उत्पाद शाही लीची को लंदन भेजा गया है। इस फल का निर्यात सिरा इंटप्राइजेज और आयात लंदन का एचएंडजे वेज कर रहा है।

शाही लीची को वर्ष 2018 में जीआई सर्टिफिकेशन मिला। इससे पहले बिहार के जर्दालू आम, कतरनी चावल और मगही पान को सर्टिफिकेशन मिल चुका है। शाही लीची का जीआई पंजीकरण मुजफ्फरपुर के लीची ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार को दिया गया है।

वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एपीडा के अध्यक्ष डाॅ एम. अंगमुथ्थु एवं कृषि विभाग के सचिव डाॅ एन सरवण कुमार ने हरी झंडी दिखाकर लीची को बिहार से लंदन के लिए रवाना किया। कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एपीडा के सहयोग से बिहार के अन्य उत्पादों को भी बाहर भेजा जाएगा। 

सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार ने कहा कि लीची का सेल्फ लाइफ काफी कम होता है। इसे 48 घंटे में लंदन पहुंचाने में एपीडा सहयोग कर रहा है। बिहार के भौगोलिक विशिष्ट उत्पाद जर्दालू आम, मखाना एवं मगही पान का भी निर्यात किया जाएगा। निर्यात के लिए आवश्यक मान्यता प्राप्त एनएबीएल लैब राज्य के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों में लगाने की प्रक्रिया हो रही है। इससे फल एवं सब्जी से जुड़े किसानों के विशिष्ट उत्पादों को भी बाहर भेजा जाएगा। 

एपीडा के अध्यक्ष डाॅ एम अंगमुथ्थु ने कहा कि कोविड महामारी खत्म होने के बाद पटना में मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण पर एक सम्मेलन होगा। इसमें खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े व्यापार संघ शामिल होंगे। साथ ही बिहार के किसान एवं किसान उत्पादक संगठन को फल एवं सब्जी निर्यात के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 

डाॅ एम अंगमुथ्थु ने बताया कि एपीडा बिहार में फलों के सेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए समेकित पैक हाऊस बनाने में भी मदद करेंगा। उन्होंने एपीडा के अधिकारियों को बिहार में फल एवं सब्जियों के लिए कार्गो सेवा की व्यवस्था का निर्देश दिया।

वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में भाभा एटोेमिक अनुसंधान संस्थान मुंबई एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के वरीय वैज्ञानिक, लीची निर्यातक आरएन सिंह एवं शोएब खान, आयातक अतिकुर रहमान, लीची उत्पादक प्रिंस कुमार एवं उनके किसान समूह उपस्थित थे। 
 


संबंधित खबरें