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कृषि व्यवसाय की दो परियोजनाओं को मिली स्वीकृति  

पटना। बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति (बीएआईपीपी) के अंतर्गत दो परियोजनाओं को पूंजीगत अनुदान की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। दोनों परियोजनाओं की लागत 570.49 लाख रुपए है। इन्हें 64.26 लाख रुपए का अनुदान मिलेगा। कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने सुरू फूड एंड बेवरेजेज (पूर्वी चंपारण) के हिमांशु कुमार एवं सियाराम मसाला (बेगूसराय) के चंदनदीप को अनुदान का सैद्धांतिक सहमति पत्र दिया। 

कृषि मंत्री बामेती, पटना में बीएआईपीपी एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बीएआईपीपी के अंतर्गत 24 परियोजनाएं विभिन्न स्तरों पर हैं। सभी परियोजनाओं की लागत 13773.59 लाख रूपए है। 

बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति का मुख्य उद्देश्य बिहार में कृषि व्यवसाय क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसे एक सितंबर, 2020 को लागू किया गया। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत निवेशकों के लिए परियोजना लागत का 15 प्रतिशत एवं किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) के लिए 25 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड पूंजीगत अनुदान का प्रावधान है। 

इस नीति के अंतर्गत अनुदान के लिए मखाना, फल एवं सब्जी, मधु, औषधि एवं सुगंधित पौधे, मक्का, बीज एवं चाय सात सेक्टर चिन्हित किए गए हैं। इन सेक्टर में न्यूनतम 25 लाख एवं अधिकतम पांच करोड़ रुपए की परियोजना वाली यूनिट की स्थापना एवं आधुनिकीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

एससी-एसएटी एवं अति पिछड़ा वर्ग के निवेशकों के लिए पांच प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान है। महिला उद्यमी, दिव्यांग, शहीद की पत्नी, एसिड अटैक पीड़ित एवं थर्ड जेंडर के उद्यमियों के लिए दो प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान किया गया है।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का मुख्य लक्ष्य असंगठित क्षेत्रों में सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूंजी निवेश सहायता प्रदान करना एवं उनकी क्षमता बढ़ाना है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 363 उद्यमियों ने निवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें 53 निवेशकों का आवेदन बैंकों को भेजा जा चुका है। 

कृषि विभाग के सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार एवं उद्यान निदेशक नंद किशोर ने भी अपने विचारों को रखा। कार्यशाला में मखाना अनुसंधान संस्थान, दरभंगा के डाॅ इंदुशेखर सिंह एवं नाबार्ड के अधिकारी मौजूद थे।
 


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