बक्सर/नई दिल्ली। बक्सर में जैव चिकित्सा अपशिष्ट (बायो मेडिकल वेस्ट) भट्टी का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन ने वर्चुअल माध्यम से किया। भट्टी ज्योति चौक के समीप लगी है। बक्सर के एक स्टार्टअप गणेश इंजीनियरिंग ने इसे विकसित किया है।
इस तकनीक का चयन वेस्ट टू वेल्थ मिशन के बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट इनोवेशन चैलेंज के माध्यम से किया गया है। यह मिशन प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद के नौ वैज्ञानिक मिशनों में से एक है। इसका नेतृत्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय करता है।
बक्सर में लगी भट्टी एक पोर्टेबल मशीन है। यह कपास, प्लास्टिक या इसी तरह की सामग्री के 50 किलो जैव अपशिष्ट को वेस्ट हीट रीकवरी के जरिए प्रबंधन करने में सक्षम है। इसे लगाने के लिए सिर्फ दो वर्गमीटर जगह की जरूरत है। कचरे के प्रारंभिक प्रज्वलन के लिए केवल 0.6 केडब्ल्यूएच बिजली की आवश्यकता होती है।
इस मौके पर प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन ने कहा कि छोटे शहर और गांवों में कोविड-19 महामारी के कारण जैव कचरे के प्रबंधन और निपटारे से जुड़ी समस्या और बढ़ गई है। यह खुशी की बात है कि बक्सर का गणेश इंजीनियरिंग जैव चिकित्सा अपशिष्ट भट्टी विकसित करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि गणेश इंजीनियरिंग अपनी तकनीक को और बेहतर बनाएं। साथ ही उत्पादन बढ़ाने के लिए विनिर्माण साझेदारों का पता लगाएं और साझेदारी करें।
बक्सर नगर परिषद के अजय चौबे ने कहा कि यह गर्व की बात है कि बक्सर स्थित एक कंपनी ने इस प्रणाली को स्वदेशी रूप से विकसित किया है। इस भट्टी को कचरा जमा वाली जगह पर आसानी से लगाया जा सकता है।
गणेश इंजीनियरिंग तीन महीने के लिए इस पायलट प्रोजेक्ट का संचालन करेगा। इसके बाद रखरखाव की जिम्मेवारी बक्सर जिला प्रशासन की होगी। पायलट प्रोजेक्ट की निगरानी और मूल्यांकन बक्सर जिला प्रशासन और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय करेगा।