पटना। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों से सरकारी सामान की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने कोटा का निर्धारण कर दिया है। विभाग एवं उपक्रम अपनी वार्षिक खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों से क्रय करेंगे। एमएसएमई-विकास संस्थान,पटना के हेड विश्व मोहन झा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इसका पालन भी विभाग कर रहे हैं।
विश्व मोहन झा इरकॉन एवं बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित स्पेशल वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। इरकॉन के जीएम शांतनु मुखर्जी ने इरकॉन की क्रय नीति की जानकारी दी। एमएसएमई- विकास संस्थान के सहायक निदेशक नवीन कुमार ने एमएसएमई मंत्रालय की पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के अंतर्गत सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए किए गए प्रावधानों को बताया।
बीआईए के अध्यक्ष राम लाल खेतान ने कहा कि प्रावधानों के बावजूद विभागों की केंद्रीयकृत खरीद के कारण इसका लाभ विकसित राज्यों को ही मिलता है। अन्य राज्य इससे वंचित रह जाते हैं। इस संबंध में बीआईए का सुझाव है कि जिस राज्य के लिए निविदा हो, वहां के उद्योगों को प्राथमिकता मिले।
साथ ही खरीदारी में 25 प्रतिशत कोटा बढ़ाकर 33 प्रतिशत एवं वेंडर रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को खत्म करने की जरूरत है। ऐसी व्यवस्था बने कि विभिन्न विभागों से निकलने वाली सारी निविदा एक जगह उपलब्ध हो। इससे उद्यमियों को सहूलियत होगी।
कार्यक्रम में डिक्की इस्ट इंडिया के उपाध्यक्ष दिनेश पासवान, एनएसआईसी के शैलेश कुमार, जेम के इम्तयाज अंसारी, एसएसएमई-विकास संस्थान के रविकांत एवं सम्राट मुरलीधर झा ने भी अपने विचारों को रखा।