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रोजगार के लिए बाहर गए लोगों को बनाया जा रहा निशाना

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि रोजगार के लिए कश्मीर गए बाहर के लोगों को जान-बूझकर निशाना बनाया जा रहा है। 20 अक्टूबर को घर में घुसकर बिहार के दो श्रमिकों की हत्या कर दी गई। एक घायल का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इससे पहले भी बिहार के दो लोगों की हत्या हुई थी। इस तरह की घटना को लेकर बिहार सरकार पूरी तरह अलर्ट है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री जनता का दरबार कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि काम करने के लिए देश के किसी भी हिस्से में जाने के लिए हर नागरिक स्वतंत्र है। गरीब लोग काम के सिलसिले में देश के हर हिस्से में जाते हैं। ऐसे लोगों की हत्या हो रही है। यह चिंता का विषय है। इस पर पूरी तौर पर कार्रवाई होनी चाहिए। हमे भरोसा है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन बिहार के लोगों की सुरक्षा का इंतजाम करेगा ताकि आतंकी इस तरह की घटना को अंजाम न दे सके।

मृतकों के आश्रितों को बिहार सरकार की ओर से हरसंभव मदद की जायेगी। श्रमिकों के पार्थिव शरीर को बिहार लाने की व्यवस्था की जा रही है। इसको लेकर बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों के संपर्क में हैं। पार्थिव शरीर को उनके गांव तक पहुंचाया जायेगा। सहायता राशि के साथ अन्य योजनाओं का लाभ भी परिजनों को मिलेगा।

एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के दौर में अन्य राज्यों में फंसे बिहार के लोगों की मदद की गई। लगभग 21 लाख लोग बिहार लौटे थे। बिहार एवं बाहर कई जगहों पर लोगों के रहने और खाने का इंतजाम कराया गया। मेरी इच्छा है कि बिहार के लोग यहीं रहकर काम करें, लेकिन हर किसी को कहीं भी जाकर काम करने की स्वतंत्रता है। किसी भी प्रदेश का आदमी दूसरे प्रदेश में जाकर काम कर सकता है। यह उसका अधिकार है।

बाहरी लोगों को कश्मीर छोड़ने के आतंकवादियों के अल्टीमेटम पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा अल्टीमेटम देने का किसी को अधिकार नहीं है। पूरा देश एक है। जम्मू-कश्मीर भी देश का अंग है। अल्टीमेटम देनेवाले आतंकवादियों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के नेताओं ने भी इस घटना पर अपनी चिंता प्रकट की है।

 


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