नालंदा। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कोविड महामारी के मद्देनजर जीवनशैली और सोच के हर पहलू का पुनर्मूल्यांकन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें लोगों के जीवन में तनाव घटाने और उन्हें प्रसन्न रखने का मार्ग खोजना होगा। उपराष्ट्रपति नालंदा में छठे धर्म-धम्म अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिंदू और बौद्ध धर्म की धर्म-धम्म परंपराओं में कोविड के बाद विश्व के सामने उभरती चुनौतियों के लिए समग्र और समावेशी जवाब मौजूद है। दोनों धर्म की शिक्षाओं को समझ कर और अपने जीवन में उतार कर कोई भी व्यक्ति शांति प्राप्त कर सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्मेलन इस बात का परीक्षण करने का अवसर प्रदान करता है कि दुनिया के सामने आ रही चुनौतियों को हल करने के लिए धर्म और धम्म की शिक्षा और प्रथाओं को किस हद तक लागू किया जा सकता है।
शांतिपूर्ण सह अस्तित्व, सहयोग, अहिंसा, मित्रता, करुणा, सच्चाई, ईमानदारी और त्याग के सिद्धांत धार्मिक उपदेशों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इसे हमारे ऋषि-मुनि, भिक्षु, संन्यासी, संत एवं मठाधीशों ने बार-बार समझाया है। भगवान बुद्ध ने हमें सरल तरीके से समझाया है कि धर्म का पालन करो, नैतिक मूल्यों का सम्मान करो, अपना अहं को त्यागो और सभी से अच्छी बातें सीखो।
उपराष्ट्रपति ने ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के नए अंदाज में प्रयास के लिए कुलपति प्रो. सुनैना सिंह की सराहना की। साथ ही उसी गौरव को फिर से हासिल करने की सलाह दी। दुनिया के सबसे बड़े आत्मनिर्भर नेट-जीरो कैंपस बनाने की दिशा में प्रयास की भी उन्होंने सराहना की।
सम्मेलन में राज्यपाल फागू चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, श्रीलंका सरकार की परिवहन मंत्री पवित्रा वन्नियाराची, इंडिया फाउंडेशन की निदेशक ललिता कुमार मंगलम और ध्रुव कटोच के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।