पटना। कृषि उत्पादक समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) पॉलिसी शीघ्र जारी करेगी। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में कृषि उत्पादक संगठनों का गठन बड़ी संख्या में किया गया है। कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के लिए नए कृषक उत्पादक संगठन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। आयोजन बामेती,पटना के सभागार में किया गया।
कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ एन. विजयलक्ष्मी, कृषि विभाग के सचिव डॉ एन. सरवण कुमार मौजूद रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए झारखंड, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल के कृषि सचिव, नेफेड के प्रतिनिधि एवं नाबार्ड के अधिकारी जुडे़ रहे।
कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में दस हजार नये एफपीओ के गठन और संवर्धन के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। बिहार के किसानों का औसत जोत आकार 0.39 हेक्टेयर है। यह भारत के किसानों के औसत जोत आकार 1.08 हेक्टेयर से लगभग 64 प्रतिशत कम है।
भूमि खंडित होने के कारण छोटे और सीमांत किसानों को लाभकारी बाजार तक पहुंचने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी चुनौतियों से निबटारे के लिए छोटे और सीमांत किसानों को एकत्र कर किसान उत्पादक संगठनों के गठन की जरूरत है।
बिहार सब्जी के उत्पादन में चौथे और फल के उत्पादन में आठवें स्थान पर है। बिहार के कृषि परिदृश्य में लघु और सीमांत किसानों का प्रभुत्व है। इनकी संख्या राज्य के कुल किसानों की 97 प्रतिशत के करीब है। कृषि उत्पादक संगठनों के गठन से किसानों को कृषि के विभिन्न पहलुओं पर सामूहिक निर्णय लेने में मदद मिलेगी। डॉ एन. विजयलक्ष्मी एवं डॉ एन. सरवण कुमार ने भी अपने विचारों को रखा।