पटना। बिहार बजट 2022-23 से पहले उद्योग एवं आईटी क्षेत्र पर विचार-विमर्श के लिए डिप्टी सीएम सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में बिहार उद्योग संघ (बीआईए), बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री समेत विभिन्न वाणिज्य संघ के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुझाव दिया।
बीआईए के अध्यक्ष अरूण अग्रवाल ने कहा कि बिहार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय असंतुलन है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय 45,000 रूपए वार्षिक है जबकि राष्ट्रीय औसत 1,35,000 रुपए है। इस बड़े अंतर को अगले दस वर्षों में कैसे खत्म किया जाए। इस चिंतन के साथ बजट को तैयार करने की आवश्यकता है। अन्य विभागों की तुलना में राज्य में उद्योग विभाग का बजट काफी कम रखा जाता है। इसे बढ़ाने की जरूरत है।
राज्य में सौर ऊर्जा के उत्पादन तथा उपयोग की असीम संभावना को देखते हुए सौर ऊर्जा आधारित इकाई स्थापना के लिए नई नीति लाने और 25 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान की व्यवस्था होनी चाहिए। स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की खरीद नीति सरल एवं व्यावहारिक होनी चाहिए।
बीआईए के अन्य सुझाव -
- औद्योगिक जमीन के लिए अलग से एमवीआर का निर्धारण, व्यावसायिक ऋण के लिए संपत्ति गिरवी रखने की स्थिति में स्टांप ड्यूटी की विसंगतियों को ठीक करने की जरूरत है।
- पार्टनरशीप फर्म के लिए वर्तमान में दो स्टेज पर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। उसे सरल करते हुए सिंगल रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की जाए।
- कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की नीति के तहत 15 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान का प्रावधान है, लेकिन बैंकों के असहयोगात्मक रवैये के कारण नीति का लाभ नहीं मिल रहा है। अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता इंडस्ट्रियल कोरिडोर बिहार से गुजर रहा है। इस क्षेत्र में इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित किया जा सकता है।
- उद्योगों के लिए बिजली अनुदान का प्रावधान हो, जिससे बिहार के उद्योग पड़ोसी राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा में बने रहे। बिजली शुल्क भी पड़ोसी राज्यों के समरूप करने की जरूरत है।
- राज्य में प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कार्य योजना बने।
- केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तर्ज पर राज्य सरकार की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन पैकेज देने का प्रावधान किया जाए।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल के सुझाव -
- चाय उद्योग के लिए अलग से प्रोत्साहन नीति बने।
- उद्यमियों की प्रोत्साहन राशि से संबंधित लंबित मामलों का शीघ निबटारा करने।
- औद्योगिक जमीन के लिए अलग से एमवीआर का निर्धारण, राज्य में त्वरित औद्योगिक विकास के लिए अधिक से अधिक इंडस्ट्रियल एरिया की स्थापना की जाए।
- बियाडा से लीज पर ली गई जमीन को फ्री होल्ड करने, सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- आईटी की बड़ी कंपनियों का डेवलपमेंट सेंटर पटना में स्थापित होना चाहिए। इससे अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
- आईटी सेक्टर को भी औद्योगिक प्रोत्साहन नीति एवं खरीद अधिमानता नीति में स्थान मिलना चाहिए।
- बिहार में आईटी से संबंधित निवेश प्रस्ताव के लिए प्रोजेक्ट एप्रेजल एंड मॉनिटरिंग कमिटी का गठन होना चाहिए।