पटना। बिहार विद्युत विनियामक आयोग की वर्चुअल जनसुनवाई में राज्य के कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े संगठनों ने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन कंपनियां अपने खर्च को कम करे, तो नए वित्तीय वर्ष से बिजली टैरिफ में वृद्धि रोकी जा सकती है। ट्रांसमिशन चार्ज विद्युत टैरिफ का एक हिस्सा होता है। यदि ट्रांसमिशन चार्ज अधिक होगा, तो टैरिफ भी अधिक हो जाएगा।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने विद्युत विनियामक आयोग से अनुरोध किया है कि बिहार ग्रिड कॉरपोरेशन एवं अन्य ट्रांसमिशन कंपनियों के राजस्व की आवश्यकता का अनुमोदन युक्तिसंगत तरीके से किया जाए। इससे अन्य राज्यों की भांति बिहार में भी बिजली टैरिफ कम होगा।
आयोग को बताया गया कि ट्रांसमिशन कंपनी एवं बिहार ग्रिड कॉरपोरेशन ने जो आंकड़ा दिया है। उसके अनुसार उनका कार्य प्रशंसनीय है। राजस्व में वृद्धि हो रही है। इस कारण पहले के वास्तविक खर्च एवं लाइन लॉस को देखते हुए ही आगे के लिए राजस्व का निर्धारण किया जाए। इससे टैरिफ पर बोझ कम होगा।
बिहार ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड एवं अन्य ट्रांसमिशन कंपनियों का कहना था कि 33 केवी लाइन की उपलब्धता 99.7 प्रतिशत है। चैंबर ने आयोग से कहा कि जब इतनी बिजली उपलब्ध है, तो राजधानी के साथ राज्य के सभी प्रमुख शहरों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध होनी चाहिए।
