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औद्योगिक नीति 2011 के तहत लगे कई उद्योग, समस्याओं के निदान की मांग

पटना। औद्योगिक नीति 2011 के अंतर्गत राज्य में लगे उद्योगों की समस्याओं के निदान की मांग उद्यमियों ने की है। उद्योग मंत्री को दिए आवेदन में उन्होंने कहा है कि बिहार में नए उद्योगों की स्थापना के लिए आपके सार्थक प्रयास के हम आभारी हैं, लेकिन पहले से कार्यरत उद्योगों के अस्तित्व को बनाए रखना भी विभाग की जिम्मेवारी है। उद्यमियों ने प्रमुख समस्याओं की ओर उद्योग मंत्री का ध्यान आकृष्ठ कराया है।

-- काल्पनिक सक्षम प्राधिकार की अनुमति के आधार पर उद्यमियों को मिलने वाले पूंजीगत अनुदान, अन्य अनुदान और वैट प्रतिपूर्ति की सहायता पर रोक लगा दी गई थी। दो वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी उद्यमियों को अब तक अनुदान नहीं मिल पाया है।

-- जीएसटी लागू होने के चार वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 2011 नीति के अंतर्गत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए नियमानुसार प्रक्रिया निर्धारण के लिए अधिसूचना निर्गत नहीं हुई है। कई प्रतिवेदन देने के बाद लोक शिकायत निवारण अधिनियम के अंतर्गत परिवाद पत्र दायर किया गया है। इसमें दाखिल रिव्यू पेटिशन पर गत चार माह में अपर मुख्य सचिव सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार से पारित किसी आदेश की जानकारी नहीं मिली है।

-- उद्योग विभाग के आग्रह पर राज्य कर विभाग ने एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के वैधानिक विषय पर अपना मंतव्य दिया था। सूचना के अधिकार अंतर्गत विभाग से उस मंतव्य की जानकारी मांगी गई थी। उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक (तकनीकी) सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार के सात दिनों में सूचना उपलब्ध कराने के आदेश के बावजूद गत पांच महीनों में सूचना उपलब्ध नहीं हुई है।

उद्यमियों ने कहा है कि 2011 नीति के अंतर्गत लगे उद्योग को भी राज्य की प्रगति में अपना सहयोगी मानते हुए सभी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।  

 


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