पटना। गन्ना किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती के लिए प्रोत्साहित करने, उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाने एवं समय पर भुगतान होने से उनके जीवन में खुशहाली आएगी। गन्ना से इथेनॉल का उत्पादन भी हो सकता है। बिहार में 17 इथेनॉल यूनिट लगाने की स्वीकृति मिली है। इससे गन्ना का उत्पादन बढ़ेगा एवं किसानों को उत्पादन का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने ये बातें बामेती परिसर में राज्यस्तरीय गन्ना किसान संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के दौरान कही। संगोष्ठी का विषय बिहार में गन्ना एवं चीनी उत्पादन : चुनौती, संभावनाएं एवं अवसर था। इस मौके पर गन्ना उद्योग एवं विधि विभाग की डायरी 2022 का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम मेें कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह एवं गन्ना उद्योग मंत्री प्रमोद कुमार भी मौजूद रहे।
डिप्टी सीएम ने कहा कि गन्ना की खेती एवं उसपर आधारित चीनी उद्योग एक दूसरे के पूरक हैं। पेराई सत्र 2021-22 में गन्ना किसानों की 92 प्रतिशत राशि का भुगतान चीनी मिल प्रबंधन ने किया है। इस सत्र के लिए उत्तम एवं सामान्य किस्म के गन्ने पर 20 रुपये एवं निम्न किस्म पर 13 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इससे उत्तम किस्म का मूल्य 335 रुपए प्रति क्विंटल, सामान्य किस्म का मूल्य 315 एवं निम्न किस्म का मूल्य 285 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
गन्ना उद्योग एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से किसानों को कम लागत पर अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। गुड़ आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए नई गुड़ प्रोत्साहन नीति बन रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि रोडमैप के माध्यम से संबंधित विभागों को जोड़कर किसान हित में विभिन्न योजनाओं को संचालित किया गया है। हाल में कृषि रोड मैप की अवधि विस्तार को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। गन्ना उत्पादन में सहायक आधुनिक संयंत्रों को भी कृषि यांत्रिकरण योजना में शामिल किया जाएगा।
चीनी बनाने के दौरान बाई-प्रोडक्ट गन्ने की सिठ्ठी और छोआ के समुचित उपयोग से इसे लाभकारी बनाया जा सकता है। अभी गन्ना की सिठ्ठी का उपयोग आम तौर पर जलाने के काम में होता है, जबकि इससे कागज बन सकता है। छोआ से अल्कोहल और खाद तैयार हो सकता है। साथ ही मवेशियों को खिलाने में भी काम आ सकता है। कृषि मंत्री और गन्ना उद्योग एवं विधि मंत्री ने भी अपने विचारों को रखा।
इस मौके पर राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक ए.के. सिंह, लखनऊ एवं कोयंबटूर समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों से वैज्ञानिक, बिहार के विभिन्न जिलों से किसान, कृषि सचिव डॉ एन. सरवण कुमार, कृषि निदेशक सावन कुमार, ईखायुक्त गिरिवर दयाल सिंह, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशक बैद्यनाथ यादव एवं बामेती के निदेशक डॉ जितेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।