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आर्थिक सर्वेक्षण : 2.5 प्रतिशत रहा बिहार का जीएसडीपी

पटना। कोरोना संकट के बावजूद बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2.5 प्रतिशत रहा। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। विधानसभा में बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 पेश करते हुए डिप्टी सीएम सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बताया कि वर्तमान मूल्य पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय 2020-21 में 50,555 रुपए रही।

2016-17 से 2020-21 तक कृषि क्षेत्र (प्राइमेरी सेक्टर) में 2.3 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र (सेकेंडरी सेक्टर) में 4.8 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र (टेरशियरी सेेक्टर) में सर्वाधिक 8.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

वित्त व्यवस्था :  आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि महामारी की चुनौतियों का जवाब राज्य सरकार ने अपने बेहतर वित्तीय संसाधनों से दिया है। वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार का कुल व्यय गत वर्ष की अपेक्षा 13.4 प्रतिशत बढ़कर 1,65,696 करोड़ रुपए पहुंच गया। इनमें 26,203 करोड़ पूंजीगत व्यय एवं 1,39,493 करोड़ राजस्व व्यय था। राज्य सरकार का अपने टैक्स और अन्य स्रोतों से राजस्व बढ़कर 36,543 करोड़ हो गया।

कृषि : राज्य की अर्थव्यस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। गत पांच वर्षों में कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्र 2.1 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा। पशुधन एवं मत्स्यपालन की वृद्धि दर क्रमश: दस और सात प्रतिशत रही है। 2020-21 में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 17.95 लाख टन रहा।

6.83 लाख टन मछली का उत्पादन होने से राज्य मछली उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है। दूध का कुल उत्पादन 115.01 लाख टन था। कृषि क्षेत्र के और अधिक विकास के लिए कृषि विभाग ने एक नया मोबाइल एप्प बिहान शुरू किया है।

उद्योग : बिहार में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने कई नीतिगत उपाय किए हैं। 2017 से 2021 के बीच राज्य को कुल 54,761 करोड़ रुपए निवेश के 1918 प्रस्ताव मिले। इथेनॉल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा तीन सर्वाधिक आकर्षक उद्योग हैं। चिकित्सा कार्य के लिए ऑक्सीजन उत्पादन में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने ऑक्सीजन प्रोत्साहन नीति 2021 भी लागू की है।

बैंंकिंग : बिहार में ऋण-जमा अनुपात 2019-20 के 36.1 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 41.2 प्रतिशत हो गया। राज्य में वार्षिक ऋण योजना का लक्ष्य 6.6 प्रतिशत बढ़कर 2020-21 में 1,54,500 करोड़ रहा। इस दौरान बैंकों ने 2.51 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए। राज्य में सभी बैंकों का एनपीए 14.9 प्रतिशत से घटकर मार्च 2021 में 11.8 प्रतिशत रह गया। राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का वर्चस्व है, लेकिन निजी क्षेत्र की शाखाएं भी बढ़ रही हैं।

ऊर्जा क्षेत्र : राज्य में ऊर्जा की प्रति व्यक्ति खपत बढ़कर 2020-21 में 350 किलोवाट ऑवर हो गई है। पीक डिमांड बढ़कर 5932 मेगावाट पहुंच गई है। बिजली की बढ़ी मांग पूरी करने के लिए 2023-24 तक विभिन्न स्रोतों से 6607 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है।

नगर विकास : शहरीकरण का वर्तमान स्तर 15.3 प्रतिशत है। नगर विकास पर व्यय 2766 करोड़ एवं आवास पर व्यय 5658 करोड़ हो गया है।

स्वास्थ्य और शिक्षा : बिहार में शिशु मृत्यु दर 29 है। यह राष्ट्रीय आंकड़ा 30 से कम है। दिसंबर 2021 तक राज्य में दस करोड़ से भी अधिक टीके लगाए गए। स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर नामांकन 139.47 करोड़ रहा । इनमें 68.13 लाख लड़कियां एवं 71.34 लाख लड़के रहे। स्कूल से बाहर रहे बच्चों की संख्या 2019-20 में 1.44 लाख थी। यह 2020-21 में घटकर 1.12 रह गई।

इन्फ्रास्ट्रक्चर : बिहार में 2011-20 के दौरान देश में परिवहन, भंडारण एवं संचार क्षेत्र में सर्वाधिक 14.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। यह सड़क एवं पुल क्षेत्र में किए गए उच्च सार्वजनिक निवेश का परिणाम है। प्रति 1000 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर सड़कों की लंबाई के मामले में केरल और पश्चिम बंगाल के बाद बिहार का ही स्थान है। ग्रामीण सड़क नेटवर्क 1,02,306 किलोमीटर हो गया है।

 


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