पटना। बिहार अब स्टार्ट-अप में भी आगे बढ़ेगा। राज्य के युवा बिहार में ही आकर स्टार्ट-अप लगाएंगे। वह दिन दूर नहीं जब बिहार देश का स्टार्टअप कैपिटल कहलाएगा। राज्य में स्टार्ट-अप्स और उद्योगों की स्थापना के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एवं सिंगल विंडो क्लीयरेंस समेत बेहतर सिस्टम बनाने की कोशिश हो रही हैं। बिहार के स्टार्ट-अप्स अब अन्य राज्यों में नहीं बल्कि बिहार में निबंधन कराकर इसे ऑपरेट करेंगे।
उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने ज्ञान भवन में बिहार स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2022 के शुभारंभ के मौके पर ये बातें कहीं। कॉन्क्लेव का आयोजन बिहार उद्योग संघ (बीआईए) के वेंचर पार्क ने किया था। इस मौके पर नए स्टार्टअप को सम्मानित भी किया गया।
बिहार एवं अन्य राज्यों के कई एंजेल इन्वेस्टर्स और वेंचर कैपिटलिस्ट्स कॉन्क्लेव में शामिल हुए। निवेशकों ने आठ लाख से लेकर साठ लाख रुपए तक का चेक बिहार की स्टार्टअप कंपनियों को दिया।
उद्योग मंत्री ने बताया कि बिहार स्टार्ट अप पॉलिसी 2017 के तहत स्टार्ट अप को दस लाख की सीड फंड के अलावा स्टांप ड्यूटी, पेटेंट फिलिंग एवं इन्क्यूबेटर्स इंसेंटिव्स समेत कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। पॉलिसी के तहत अबतक 145 स्टार्ट अप कंपनियों को 5.95 करोड़ की पहली किस्त और 62 को दोनों किस्त के रूप में 3.55 करोड़ राशि वितरित की गई।
राज्य के स्टार्ट-अप को कैपेसिटी बिल्डिंग और प्रशिक्षण की सुविधा देने के लिए राज्य सरकार ने आईआईटी, एनआईटी, डीएमआई एवं सीआईएमपी जैसे 16 इन्क्यूबेटर्स को यह जिम्मेवारी सौंपी है। हाल ही में उद्योग विभाग ने सिडबी के साथ भी एमओयू किया है। उद्योग भवन में एक आइडिएशन लैब भी बन रहा है। इसके संचालन के लिए आईआईटी पटना के साथ समझौता हुआ है।
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सह सीएम के प्रधान सचिव डॉ एस. सिद्धार्थ ने कहा कि स्टार्ट अप पॉलिसी का उद्देश्य नौकरी खोजने की जगह अपना उद्यम लगाना में मदद करना है। नए स्टार्टअप इस कार्य में प्रेरणाश्रोत बनेंगे। विकसित राज्यों की तरह बिहार में भी स्टार्ट अप का माहौल बना है।
कॉन्क्लेव को बीआईए के अध्यक्ष अरुण अग्रवाल, वेंचर पार्क के सदस्य सचिव सुबोध कुमार एवं गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रमथ राज सिन्हा ने भी संबोधित किया। इस मौके पर एमएलसी राजेंद्र गुप्ता, बीआईए के सभी सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष मौजूद रहे।