पटना। कृषि क्षेत्र में नई तकनीक का विकास हो रहा है। इसे किसानों के खेत तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। प्रसार में वही लोग सफल होते हैं, जो किसानों के साथ संवाद में प्रवीण हो। कृषि वैज्ञानिकों के पास काफी जानकारी है। जब-तक किसानों तक यह ज्ञान नहीं पहुंचेगा, तब-तक नई तकनीक को धरातल पर लाना संभव नहीं होगा। इस कार्य में कृषि विज्ञान केंद्रों की भी अहम भूमिका है।
उक्त बातें कृषि सचिव डॉ एन. सरवण कुमार ने बामेती परिसर में किसान मेला सह प्रदर्शनी के शुभारंभ के मौके पर कहीं। दो दिवसीय (29-30 मार्च) किसान मेला का आयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने किया है। किसान मेला का मुख्य विषय ग्रामीण आजीविका में सुधार एवं सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकियां है। कृषक संदेश पत्रिका का भी विमोचन किया गया।
इस मौके पर विभिन्न जिलों से आए किसान, कृषि वैज्ञानिक, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरुण कुमार, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ आरके सोहाने, कृषि विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार, उप निदेशक अनिल कुमार झा एवं बामेती के निदेशक डॉ जितेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।
कृषि सचिव ने कहा कि किसान मेला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषि विज्ञान केंद्र एवं किसानों के अच्छे कार्यों का प्रदर्शित करना है। कृषि विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्य अनुसंधान,शिक्षा और प्रसार है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रसार गतिविधि है।
जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ा मुद्दा है। फसल की कटाई के बाद पुआल जलाने की प्रवृति बढ़ी है। हमें किसानों को समझाना होगा कि इसे जलाएं नहीं बल्कि, उसका प्रबंधन करें। फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वराशक्ति को नुकसान होता है।
राज्य सरकार के जल-जीवन-हरियाली अभियान एवं सात निश्चय दो कार्यक्रम में कृषि विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हर खेत तक सिंचाई का पानी अंतर्गत दक्षिणी बिहार के 17 जिलों में 1480 चैक डैम का निर्माण किया जाना है। अगले पांच वर्षों में एक लाख एकड़ क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई का उपयोग किया जाना है।
बीएयू के कुलपति ने कहा कि किसान मेला किसान और वैज्ञानिकों के बीच संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। मेले में किसान नई कृषि तकनीक से रू-ब-रू होते हैं और अपनी आय की वृद्धि का गुर सीखते हैं।