मुजफ्फरपुर। बिहार में एक अप्रैल से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए सिंगल विंडो सिस्टम कार्य करना शुरू कर देगा। इससे एक ही छत के नीचे उद्योग लगाने के लिए सारी सुविधाएं उद्यमियों को सुलभ होंगी और राज्य में औद्योगिकरण का काम तेजी से होगा। उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुझे जो जिम्मेदारी मिली है। उसे निभाते हुए बिहार को उद्योग क्षेत्र में नई ऊंचाई पर ले जाना है। उद्योग मंत्री मुजफ्फरपुर में एमएसएमई विकास संस्थान के एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बिहार के अधिकतर उद्योग एमएसएमई के दायरे में हैं। उद्यमियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण वे इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। बिहार में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सभी स्तर पर काम हो रहा है। चंपारण में मेगा टेक्सटाइल पार्क के लिए प्रयास इसका उदाहरण है।
बिहार की इथेनॉल पॉलिसी के तहत दी गई रियायत एमएसएमई को मजबूती प्रदान करने की दिशा में बेजोड़ पहल है। बिहार में पिछले एक साल में करीब 40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं। उनमें अधिकतर एमएसएमई सेक्टर के हैं।
उद्योग मंत्री ने कहा कि एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए कोशिश होती है कि उत्पाद के चयन से लेकर इकाई की स्थापना में पूरी मदद की जाए। उत्पाद के निर्माण और उसकी मार्केटिंग में भी सहयोग मिले। अगर उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पकड़ बनाने लायक हैं, तो उसके निर्यात में हर संभव मदद की जाए।
केंद्र सरकार की तरफ से उद्यमी रजिस्ट्रेशन, एमएसएमई चैंपियन, प्रोक्योरमेंट एवं मार्केंटिंग सपोर्ट स्कीम, इंटरनेशनल को-ऑपरेशन स्कीम एवं पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी जैसी बेहद खास योजनाएं हैं। बिहार में क्लस्टर योजना के तहत कई जिलों में अच्छे क्लस्टर तैयार हुए हैं।
उद्योग मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत राज्य में 16 हजार युवाओं को पांच लाख लोन और पांच लाख अनुदान के लिए चयनित किया गया है। राज्य सरकार की जिला औद्योगिक नव प्रवर्तन योजना, क्लस्टर विकास, बिहार स्टार्ट अप नीति, मुख्यमंत्री सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्लस्टर योजनाओं से बिहार में लघु, सूक्ष्म और मध्यम दर्जे के उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं।