मुख्य समाचार

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसान चौपाल का शुभारंभ

पटना। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसान चौपाल का शुभारंभ कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रचार रथों को फसल अवशेष जलाने वाले जिलों के लिए रवाना किया गया। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि फसल अवशेष को खेतों में न जलाकर उसे मिट्टी में मिला दें या वर्मी कंपोस्ट बना लें। ऐसा करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी।

पटना एवं मगध प्रमंडल के अधिकतर जिलों में गेहूं की कटनी कंबाइन हार्वेस्टर से की जाती है। कटनी के बाद गेहूं की खूंटी एवं अवशेषों को खेतों में ही जला दिया जाता है। एक टन फसल अवशेष जलाने से लगभग 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड एवं दो किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड गैस वातावरण में फैलती है। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है।

पटना प्रमंडल की 200 पंचायतों में 11 अप्रैल से 17 अप्रैल तक फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर विशेष किसान चौपाल का आयोजन होगा। फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। मगध प्रमंडल की 62 पंचायतों में भी नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाएगा।

कृषि सचिव डॉ एन. सरवण कुमार ने किसानों से रीपर कम बाइंडर से गेहूं की कटाई तथा स्ट्रॉरीपर से अवशेष को भूसा बनाकर पशु चारा के रूप में उपयोग करने की सलाह दी।

 


संबंधित खबरें