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आरबीआई ने बढ़ाया रेपो रेट, लोन हो जाएगा महंगा

नई दिल्ली/पटना। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने रेपो रेट एवं सीआरआर की वर्तमान दर में वृद्धि की है। आरबीआई की मोनेटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने दो से चार मई की बैठक के बाद रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट एवं सीआरआर 50 प्वाइंट बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे रेपो रेट तत्काल प्रभाव से 4.40, बैंक रेट 4.65 एवं सीआरआर 21 मई से 4.50 प्रतिशत हो जाएगा।   

रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए आरबीआई ने ब्याज दरों में वृद्धि का फैसला किया है। इस बढ़ोतरी का असर लोन की ईएमआई पर भी पड़ेगा। एमपीसी की अगली बैठक छह से आठ जनू को होगी।  

आरबीआई ने लगभग दो वर्षों के बाद रेट में परिवर्तन किया है। कोविड महामारी को देखते हुए 22 मई, 2020 की बैठक में रेपो रेट, बैंक रेट एवं रिवर्स रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई थी। इसके बाद रेपो रेट 4, बैंक रेट 4.25 एवं रिवर्स रेपो रेट 3.35 प्रतिशत पर आ गया था।   

बीआईए की प्रतिक्रिया : आरबीआई की मौद्रिक नीति पर बिहार उद्योग संघ (बीआईए) ने चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने कहा कि रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत एवं सीआरआर में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि आम लोगों के साथ उद्योग एवं वाणिज्य के लिए चिंता का विषय है।

रेपो रेट में वृद्धि से ब्याज दर बढ़ेगा। इससे ग्राहकों पर लोन का बोझ बढ़ जाएगा। सीआरआर बढ़ने से बैंकों के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए कम राशि उपलब्ध होेगी।

बीआईए अध्यक्ष ने कहा कि कोविड महामारी से देश का उद्योग एवं वाणिज्य जगत उबरने का प्रयास कर रहा है। इस परिपेक्ष्य में हमें उम्मीद थी कि रेपो रेट एवं सीआरआर में कोई परिवर्तन नहीं होगा। कम से कम उद्योग के लिए रेपो रेट और सीआरआर में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।

उद्योग एवं व्यापार जगत पहले से ही महंगाई, पेट्रोल-डीजल के मूल्य में बेतहासा वृद्धि एवं यूक्रेन-रूस युद्ध से प्रभावित है। ऐसे समय में रेपो रेट एवं सीआरआर में वृद्धि उचित नहीं है। आरबीआई को इसपर विचार करना चाहिए।

 


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