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बिहार टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी कैबिनेट से स्वीकृत

पटना। बिहार टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी 2022 को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई। उद्योग विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्वीकृति दी गई। इसके अलावा अन्य विभागों के 17 प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। बिहार में टेक्सटाइल और लेदर उद्योगों की तेजी से स्थापना हो। इसके लिए पॉलिसी में कई प्रावधान किए गए हैं।

कैबिनेट की बैठक के बाद उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने बताया कि राज्य में टेक्सटाइल और लेदर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए देश की सबसे बेहतर पॉलिसी तैयार की गई है। इस पॉलिसी के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 30 जून, 2023 है।  

पॉलिसी में पूंजीगत अनुदान, रोजगार, बिजली, फ्रेट एवं पेटेंट अनुदान समेत कई इंसेंटिव्स की व्यवस्था की गई है। इससे देश भर के टेक्सटाइल और लेदर उद्योग से जुड़े कारोबारी एवं उद्योगपतियों को बिहार में उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय कपड़ा और चमड़ा बाजार में काफी अवसर हैं।

बिजली टैरिफ दो रुपए प्रति यूनिट : बिहार में इससे संबंधित उद्योग लगाने वालों को दस करोड़ तक का पूंजीगत अनुदान मिलेगा। सिर्फ दो रुपए प्रति यूनिट पावर टैरिफ का भी लाभ दिया जाएगा। बिजली अनुदान के माध्यम से बिहार में लगने वाली औद्योगिक इकाईयों को प्रतिस्पर्धात्मक बिजली दर मिल सकेगी।

पांच हजार रुपए प्रति कामगार रोजगार अनुदान : उद्योग मंत्री ने कहा कि कपड़ा और चमड़ा उद्योग श्रम शक्ति प्रधान उद्योग हैं। पॉलिसी में पांच हजार रुपए प्रति कामगार रोजगार अनुदान का प्रावधान किया गया है। यह औद्योगिक इकाईयों के लिए काफी मददगार साबित होगी।

जीएसटी एवं निबंधन शुल्क पर छूट : ऋण पर दस प्रतिशत तक का ब्याज अनुदान, एसजीएसटी का सौ फीसदी रीइंबर्समेंट, हर वर्ष प्रति कर्मचारी बीस हजार रुपए का कौशल विकास अनुदान, स्टांप एवं निबंधन शुल्क पर सौ फीसदी छूट के साथ भूमि संपरिवर्तन पर भी सौ फीसदी छूट जैसे कई प्रावधान हैं।

फ्रेट और पेटेंट सब्सिडी का प्रावधान : बिहार के तेज औद्योगीकरण के लिए दस लाख तक प्रति वर्ष फ्रेट सब्सिडी और दस लाख प्रति पेटेंट के हिसाब से पेटेंट सब्सिडी का भी प्रावधान बिहार टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी 2022 में किया गया है।

उद्योग मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल और लेदर उद्योगों के लिए बिहार बेहतरीन डेस्टिनेशन है। उद्योग की सफलता के लिए बिहार में युवा और प्रशिक्षित श्रम शक्ति भी उपलब्ध है।

 


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