पटना। कृषि उत्पादों के निर्यात में और अधिक वृद्धि करने के लिए बिहार कृषि निर्यात नीति तैयार की जा रही है। यह अंतिम चरण में है। इससे निर्यात बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। राज्य में वर्ष 2005-06 में जहां तीन करोड़ रुपए मूल्य का कृषि निर्यात होता था, वहीं 2021-22 में बढ़कर यह लगभग 3270 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
कृषि सचिव डॉ एन. सरवण कुमार ने यह जानकारी दी। वह मीठापुर स्थित कृषि भवन में एक जिला,एक उत्पाद के अंतर्गत कृषि निर्यात को बढ़ावा विषय पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषक उत्पादक संगठन, निर्यातक एवं व्यापारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के विशेष सचिव रवींद्रनाथ राय ने की।
कृषि सचिव ने कहा कि बिहार में कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गयी है। बिहार खाद्यान्न फसलों के उत्पादन में अग्रणी राज्य है। वर्तमान में फल और सब्जियों के उत्पादन में बिहार एक प्रमुख राज्य है। बिहार आज शाही लीची, जरदालु आम, कतरनी चावल, मखाना जैसे विशिष्ट कृषि और बागवानी उत्पादों से अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
किसानों की आय में वृद्धि लाने के लिए वर्ष 2020 में कृषि विभाग में बिहार कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन प्रणाली (बावास) संभाग का गठन किया गया है। हाल के वर्षों में बिहार के कृषि उत्पादों के निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। बावास संभाग किसान, कृषक उत्पादक संगठन, निर्यातक एवं व्यापारियों के क्षमता संवर्द्धन के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के साथ सहयोग कर रहा है।
डॉ एन. सरवण ने बताया कि कृषि निर्यात को ध्यान में रखते हुए एक जिला, एक उत्पाद योजना के तहत् इस वर्ष पांच से 26 अगस्त तक पटना, गया, पूर्णियां, पूर्वी चंपारण एवं दरभंगा में एक दिवसीय क्षमता संवर्द्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क होगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यान निदेशक नंद किशोर, बसोका निदेशक सुनील कुमार पंकज, बावास के उप निदेशक सनत कुमार जयपुरियार, एफआईईओ के सहायक निदेशक जुईन चौधरी, गोलोक चटर्जी, नाबार्ड के एजीएम अमित कुमार गौतम, ट्रेड फाइनांस सेंटर कोलकाता के वीके राजपूत, एपीडा के शुभम राय एवं एग्रोफ्रेस कोलकाता के निदेशक अंकुश साहा मौजूद रहे।